मेरठ। डेयरियों ने दूध के दाम बाजार में तो बढ़ा दिए हैं। लेकिन वो जिन पशुपालकों से दूध खरीद रहे हैं उनके लिए दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। जिससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समय हरे चारे से लेकर पशु आहार के दाम तक आसमान पर पहुंच गए हैं। जिसके चलते दुधारू पशु पालक किसान परेशान हैं। दूध की डेयरियों में गाय के दूध की खरीद 35 रुपये की जा रही है। जबकि ग्राहकों को यहीं दूध 50 रुपये किग्रा पर बेचा जा रहा है। पशुपालकों का कहना है कि डेयरियों द्वारा दूध के दाम नहीं बढ़ाए जाने और चारे की कीमतें बढ़ने से दूध का काम अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। दुधारू पशुपालक रमेश का कहना है कि दूध बेचने वाले उनसे भैंस दूध 40—45 रुपये लीटर ले रहे हैं। जबकि गाय के दूध का दाम (Milk Price Hike) 35 रुपये लीटर ले रहे हैं। जबकि दोनों ही पशुओं का दूध काफी बढ़ी दरों पर बेचा जा रहा है। जिससे पशुपालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बता दे कि गत सिंतंबर और अक्टूबर माह में हुई बारिश के दौरान धान की फसल काफी खराब हो गई। जिससे धान की पुआल भी खराब हो गई। जिससे भूसे के दाम आसमान पर पहुंच चुके हैं। इस समय भूसा 14 सौ रुपये प्रति कुंतल खरीदा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों को भूसा नहीं मिल रहा है। जिसके चलते उनको बाहर से भूसा खरीदना पड़ रहा है। इस साल की अपेक्षा अन्य वर्षों में इन दिनों भूसे के दाम करीब 600—700 रुपये प्रति कुंतल होते थे। जो कि अब काफी बढ़ गए है। पशुपालक बेगराज का कहना है कि महंगाई की मार इस बार भूसे पर अधिक है। यहीं कारण है कि यह दोगुने दाम पर बिक रहा है।
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वहीं दुधारू पशुओं को खिलाई जाने वाली खल की 68 किलो की बोरे 22 —23 सौ रुपये प्रति क्विंटल पर आ रही है। इस पर भी 600 रुपये दाम बढ़े हैं। चौकर बोरा भी 1200—1300 रुपये का मिल रहा है। वहीं दुधारू पशु पालकों का कहना है कि डेयरियों ने दूध के दाम बाजार (Milk Price Hike) में तो बढ़ा दिए हैं। लेकिन किसानों के लिए दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। इससे दुग्ध किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

