अमित बिश्नोई
बसपा प्रमुख मायावती कह रही हैं कि अखिलेश यादव उन्हें राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं लेकिन उन्हें सीएम या पीएम ही बनना है. लेकिन बुआ जी बबुआ के ऑफर को क्यों ठुकरा रही हैं इसकी भी बड़ी दिलचस्प वजह है, मायावती के मुताबिक अखिलेश अपने रास्ते का काँटा हटाना चाहते हैं ताकि मुख्यमंत्री बनने की राह में कोई अड़चन न पैदा हो. बहन जी भी कमाल की हैं, पता नहीं अखिलेश ने उनको कब यह ऑफर दिया, शायद वह अखिलेश के उस बयान से खुद को जोड़ रही होंगी जिसमें अखिलेश ने राष्ट्रपति चुनाव में गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी उम्मीदवार की वकालत की थी, बहन जी ने दिमाग़ लगाया, सोचा यह तो समाजवादी पार्टी की बड़ी साज़िश लग रही. मुख्यमंत्री के साथ साथ उनसे प्रधानमंत्री बनने का मौका भी छीनना चाहती है.
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वैसे बहनजी की प्रधानमंत्री बनने वाली बात मज़ेदार है. सपने हमेशा बड़े ही देखना चाहिए, जब चार बार मुख्यमंत्री बनकर मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो बुआ जी क्यों नहीं, वह भी तो चार बार सीएम रही हैं , क्या हुआ जो इसबार एक भी विधायक नहीं जिता पायीं। विजन हमेशा बड़ा होना चाहिए, जब बड़ा सोचोगे तभी तो बड़ा मिलेगा। वैसे बहनजी के दिमाग़ में प्रधानमंत्री बनने का आईडिया आया कहाँ से? शायद प्रशांत किशोर और कांग्रेस की डील टूटने से उनके दिमाग़ में यह आईडिया आया होगा, सोचा होगा यही वो बंदा है जिसने चार बार मुख्यमंत्री रहे मोदी जी को प्रधानमंत्री बनवा दिया, डील टूटने से आजकल खाली है, क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाय.
प्रशांत किशोर को भी एक गैरभाजपाई नेशनल पार्टी चाहिए और तकनीकी तौर पर बसपा को राष्ट्रीय पार्टी ही माना जाता है, बहरहाल यह आगे का विषय है, अभी तो मेरे दिमाग़ में इस आईडिया को लेकर जो बात समझ में आयी वो मैंने आप लोगों से शेयर कर दी, मानिये चाहे न मानिये। बहन जी हैं कुछ भी सोच सकती हैं, कुछ भी कह सकती हैं. बहनजी दरअसल दलित-मुस्लिम का गठजोड़ टूटने से बहुत परेशान हैं. अखिलेश मुसलमानों को ले गए और भाजपा ने दलितों को घसीट लिया तो अब बहन जी के पास बचा क्या। निल बटा सन्नाटा इसीलिए तो हो गया. अब इसके लिए वह भाजपा पर इतना नाराज़ नहीं हैं जितना बबुआ से खफा हैं हालाँकि चोट दोनों ने पहुंचाई। वैसे कहने वालों की ज़बान कौन रोक सकता है, कुछ तो लोग कहेंगे क्योंकि लोगों का काम है कहना और लोग यही कह रहे हैं बहिन जी ने खुद ही दलितों को भाजपा में भेजा। बहिन जी के लिए बड़ा दुश्मन कौन? सपा या बसपा? कांग्रेस तो अभी इस लाइन में नहीं है। इसीलिए बुआ जी बबुआ पर हमले का कोई मौका नहीं चूकतीं बल्कि मौका न हो तब भी मौका निकाल ही लेती हैं।
बहरहाल आज उन्होंने एक बात तो क्लियर कर दी कि वह कभी राष्ट्रपति नहीं बनेंगी। उनके हिसाब से राष्ट्रपति बनकर वह देश सेवा नहीं कर सकतीं ,उसके लिए CM या PM होना ही ज़रूरी है, हालाँकि उन्होंने फर्स्ट चॉइस का ज़िक्र नहीं किया लेकिन यह उम्मीद ज़रूर जताई कि दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व अपरकास्ट समाज अगर ठान ले तो वह उन्हें प्रधानमंत्री भी बना सकता है. बात तो बहनजी ने बिलकुल सही कही अब जब यह सब लोग ठान लेंगे तो किसी को भी प्रधानमंत्री बना सकते हैं, यहाँ तक कि राहुल गाँधी को भी, अगर उनके नसीब में राजयोग हुआ तो.
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वैसे बहन जी मैं आपको एक राय दूँ, अखिलेश का ऑफर बुरा नहीं है, मुख्यमंत्री का सुख तो आप भोग ही चुकी हैं, प्रधानमंत्री की बात तो बस कभी न पूरा होने वाला एक सपना ही समझिये, राष्ट्रपति बनने का चांस ज़रूर बन सकता है अगर समीकरण आपके पक्ष में बैठे और आप भाजपा के किसी लायक हुईं तो, वैसे भी अब आप अपने वारिस (भतीजे) को आगे लाने के लिए प्रयासरत हैं इसलिए अखिलेश की मदद लीजिये और राष्ट्रपति बन जाइये, पता नहीं कब अखिलेश का मन बदल जाय और आज बकौल आपके जो वह आपको राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं फिर यह ऑफर मिले न मिले। वैसे राष्ट्रपति के इस ऑफर को स्वीकारने से पहले मोदी जी से भी एकबार पूछ ज़रूर लीजियेगा, अखिलेश का कोई भरोसा नहीं। आप तो जानती हैं बबुआ बहुत शैतान है, जब सगे चाचा को नहीं छोड़ा तो मुंहबोली बुआ क्या चीज़ हैं.

