इन दिनों बाजार में जामुन की आवक शुरू हो चुकी है। बाजार में और सड़कों के किनारे ठेलों पर से लोग जामुन खरीदते दिख जाएंगे। लेकिन जामुन कितनी सेहतमंद होती है इसके बारे में शायद कोई नहीं जानता। जामुन पाचक, अग्निप्रदीपक,स्तंभक रोकने वाला तथा बारिश के मौसम में अनेक रोगों में उपयोगी है। जामुन में लोहतत्व पर्याप्त मात्रा में होता है। पीलिया रोगों में जामुन का सेवन हितकारी है। जामुन यकृत,तिल्ली और खून की अशुद्धि को दूर करता है। जामुन खाने से खून की अशुद्धि दूर हो जाती है तथा लालिमा युक्त बनता है। जामुन अतिसार,मधुमेह, पेचिस, पथरी, यकृत, संग्रहणी के रोगों और रक्तजन्य विकारों को दूर करने वाला है।
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मधुमेही के रोगियों के लिए जामुन बीज का चूर्ण सबसे अच्छा है। वायु प्रकृति वाले जामुन में नमक, जीरा पाउडर और संतकृपा चूर्ण लगाकर जामुन खाये। अच्छे पक्के जामुन सुखाकर बारीक कूटकर बनाया गया चूर्ण प्रतिदिन सुबह–शाम पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है। प्रदर रोग में कुछ दिनों तक जामुन के वृक्ष की छाल के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से प्रदर रोग ठीक होता है। जामुन के बीज को पानी में घिसकर लगाने पर मुंह के मुहाँसे ठीक होते हैं। जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना ले। दो गोली नित्य चार बार चुसें। इससे बैठा गला खुलता है। जामुन भूख बढ़ाता है। बारिश में पेट के रोगों को ठीक रखने में मदद करता है।

