लखनऊ। चुनाव जब करीब होता है तो राजनीतिक दलों के नेताओं का एक-एक कदम और एक-एक बातों की अग्रिपरीक्षा होती है। ऐसा ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर हो रहा है। यहां भारतीय जनता पार्टी अपने खास विरोधी दल समाजवादी पार्टी पर पैनी नजर बनाये हुए है। अंदर की खबर यह है कि, पूर्व सीएम अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव स्वर्गीय भाजपा नेता कल्याण सिंह के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करने नहीं गए लेकिन, मायावती पहुंची। बीजेपी अब इसको अब मुद्दा बना कर पेश कर रही है।
इस पॉलिटिकल वार का प्लेटफार्म बना है सोशल मीडिया। बीजेपी के नेताओं ने इस मामले में न केवल अखिलेश यादव बल्कि समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव पर भी निशाना साधा है। कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित न करने पर अखिलेश को बीजेपी के नेता हिंदू विरोधी होने का टैग लगा रहे हैं। इस मुद्दे को बीजेपी अब चुनाव तक खींच कर ले जाएगी।
एक वक्त था जब बीजेपी से बाहर जाने के बाद कल्याण सिंह सपा में शामिल हो गए थे। शामिल होने के बाद में इसका नकारात्मक प्रभाव मुलायम सिंह यादव को काफी भोगना पड़ा। 2007 में सपा सरकार चली गई थी और 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के मुकाबले कांग्रेस और बसपा को लोकसभा में अच्छी सीटें मिली थीं। कल्याण को केवल सपा में शामिल किए जाने से मुसलमान बहुत अधिक नाराज हुए थे।
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2010 में मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह को पार्टी में शामिल किए जाने को लेकर सार्वजनिक माफी मुसलमानों ने से मांगी थी। जिसके बाद एक बार फिर से सपा को मुसलमानों को भरपूर समर्थन मिला था और 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने थे और मुसलमानों का जबरदस्त समर्थन उनको प्राप्त हुआ था। जिसके बाद से ही सपा ने कल्याण सिंह से दूरी बना ली थी।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के मुताबिक, अपने आवास से एक किमी की दूरी पर न जाकर अखिलेश यादव ने बाबू जी को श्रद्धांजलि नहीं दी। उन्होंने अपना सांप्रदायिक चेहरा दिखा दिया है। वे पिछड़ों के सबसे बड़े नेता थे। डिप्टी सीएम केपी मौर्य ने कहा कि अखिलेश पिछड़ों के प्रति ढोंग करते हैं। उन्होंने पिछड़े वर्ग के सबसे बड़े नेता को श्रद्धांजलि नहीं दी।
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उपाध्यक्ष और लविवि के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंह ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से अखिलेश यादव पर निशाना साधा है और कहा कि वे स्वयं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं और दूसरे कद्दावर पूर्व मुख्यमंत्री को 500 मीटर चल कर श्रद्धांजलि देने नहीं आए। यह स्पष्ट करता है कि टीपू अपने नाम को चरितार्थ करते हैं और केवल सांप्रदायिक राजनीति ही कर रहे हैं। इसी तरह से भाजपा की आईटी सेल की ओर से भी सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटाफार्म पर अखिलेश यादव के खिलाफ लगातार पोस्ट शेयर की जाती रहीं।

