उत्तराखंड के जोशीमठ में विकास की वजह हो रही विनाशलीला यानि भू-धंसाव को लेकर राज्य और केंद्र सरकारें बहुत सतर्क हो गयी हैं. राज्य के उच्च अधिकारीयों ने जोशीमठ में भू-धंसाव क्षेत्र में रह रहे लोगों को फ़ौरन सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का आदेश जारी किया। इस पूरे क्षेत्र को चार ज़ोन में बांटा गया जिसमें एक और दो ज़ोन के लोगों को फौरी तौर पर वहां से हटाने को कहा गया है, इसमें जोन एक में आने वाले सभी भवनों को ध्वस्त करने की बात कही गयी है।
सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा रहे हैं लोग
भू धंसाव की वजह से वाटर और सीवर लाइने जगह से टूट चुकी है जो रिसाव का बहुत बड़ा कारण बन गयी हैं वहीँ सड़कों पर दरारें पड़ने और धंसने से पॉवर लाइन भी काफी प्रभावित हुई है और इलाके में बिजली की सप्लाई प्रभावित है. अधिकारीयों को इन्हें दुरुस्त करने की हिदायत जारी की गयी है. दरार पड़े भवनों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि उन भवनों के गिरने की वजह से दूसरे भवनों , मंदिरों को और ज़्यादा नुक्सान न हो. प्रभावित लोगों को हेलीकॉप्टरों द्वारा सुरक्षित स्तनों पर शिफ्ट किया जा रहा है जहाँ उनके लिए सारी व्यवस्थाओं का इंतज़ाम किया गया है.
सरकार से नाराज़ हैं लोग
वहीँ प्रभावित लोगों में सरकार को लेकर काफी निराशा और नाराज़गी है, लोग रो रहे हैं, अपने टूटते घरों को देखकर, उन्हें अपने सर से छत हटती हुई दिख रही है. इन सभी लोगों का कहना है कि सरकार ने इस आपदा को लेकर लगातार अनदेखी की. कितनी बार सरकार को लिखा गया, चेताया गया मगर सरकार को सिर्फ अपनी परियोजनाएं दिख रही थीं, उसे नहीं दिख रहा था इससे पर्यावरण कितना प्रभावित होगा, क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थिति कितनी बदलेगी। धमाकों से पहाड़ियां कितनी हिलेंगी। इन लोगों का कहना है कि सारी उम्र की मेहनत और कमाई से खड़ा किया गया उनका आशियाना विकास से पैदा विनाश की भेंट चढ़ रहा है.

