Kartik Swami Mandir: जहां भगवान कार्तिकेय की हड्डियों की होती है पूजा

धर्मKartik Swami Mandir: जहां भगवान कार्तिकेय की हड्डियों की होती है पूजा

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रुद्रप्रयाग- उत्तराखंड में भगवान शिव और माता पार्वती के कई मंदिर आपको दिखाई दे जाएंगे. लेकिन आज हम आपको भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय के एकमात्र ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं. जो ना केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य की अद्भुत छटा और पर्वतों का विहंगम दृश्य यहां आने वाले भक्तों को बार-बार आने पर विवश करता है. रुद्रप्रयाग के कनक चोरी गांव में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर (Kartik Swami Mandir) साल भर दर्शन के लिए खुला रहता है. हिमालय पर्वत की श्रृंखला में क्रोच पर्वत के शिखर पर स्थापित इस मंदिर से प्रकृति का ऐसा अद्भुत नजारा दिखाई देता है. जो आप के धार्मिक अनुभव को रोमांच से भर देता है.

धार्मिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों की परीक्षा लेने के उद्देश्य से उन्हें ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर वापस आने का आदेश दिया. तब भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ की परिक्रमा कर इस परीक्षा में अव्वल आए. भगवान कार्तिकेय जब ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर वापस आए और उन्हें गणेश के विजय होने का समाचार मिला. तो वे क्रोधित हो गए. कहा जाता है कि कार्तिकेय अपना शरीर का पूरा मांस माता-पिता को अर्पित कर क्रोच पर्वत पर समाधि में बैठ गए. माना यह जाता है कि भगवान कार्तिकेय की यह हड्डियां आज भी इस मंदिर में मौजूद हैं. जिनकी पूजा करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. यूं तो देश के अलग-अलग कोने से भक्त दर्शन के लिए यहां आते हैं. लेकिन बंगाली समुदाय और दक्षिण भारत के लोगों के लिए यह मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है.

मनमोहक दृश्य

समुद्र तल से करीब 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर (Kartik Swami Mandir) तक जाने के लिए आपको रुद्रप्रयाग से करीब 38 किलोमीटर दूर कनक चोरी गांव पहुंचना होगा. यहां से करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर आप कार्तिक स्वामी मंदिर पहुंच सकते हैं. 3 किलोमीटर का यह ट्रैक आपको उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू कराता है. आपको इस ट्रैक पर बांज और बुरांश के जंगल दिखाई देंगे. जंगल में पक्षियों के कलरव से आनंदित होकर आपको पता ही नहीं चलता कि आप क्रौंच पर्वत पर स्थित नारायण स्वामी मंदिर कब पहुंच गए. मंदिर परिसर में पहुंचकर आपको हिमालय की अधिकतर चोटियों के दर्शन करने को मिल सकते हैं. मौसम अगर साफ हो तो यहां से आपको चौखंबा, केदार पर्वत, मेरु-सुमेरू पर्वत, त्रिशूल, नीलकंठ, नंदा देवी, नंदा कुटी, रुद्रनाथ, दूनागिरी चोटिया साफ दिखाई देंगी. 12 महीने खुले रहने वाले इस मंदिर में आपको गर्मियों में सुहाना मौसम और जबकि सर्दियों में बर्फ का आनंद मिलता है. मंदिर परिसर से आपको घाटी में छोटे-छोटे सुंदर गांव दिखाई देंगे जो आपकी इस धार्मिक यात्रा को रोमांच में बदल देता है.

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