हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुईं न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने कहा है कि न्यायाधीशों को अपनी धार्मिकता को सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं लाना चाहिए। बार एंड बेंच को दिए गए साक्षात्कार में न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि न्यायाधीशों को हमेशा संविधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए – जो उनका धर्म है। न्यायमूर्ति कोहली की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गणपति पूजा समारोह के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के आवास पर जाने के विवाद के बीच आई है।
धार्मिक कार्यों में न्यायाधीशों की सार्वजनिक भागीदारी पर उनके विचार के बारे में पूछे जाने पर न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, “मैं अपने लिए बोलूंगी क्योंकि सवाल मुझसे पूछा गया है। सख्ती से कहें तो न्यायाधीशों को सार्वजनिक क्षेत्र में धार्मिकता को अपने ऊपर नहीं रखना चाहिए। धार्मिकता, धर्म या आस्था, मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमें इन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं लाना चाहिए। यह बहुत निजी है। इसे चार दीवारों के भीतर ही रहना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को कभी भी लोगों को यह आभास नहीं देना चाहिए कि उनके व्यक्तिगत झुकाव न्याय के वितरण में हस्तक्षेप कर सकते हैं। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार के अलावा किसी को भी अपने निजी क्षेत्र में आने की अनुमति नहीं दी है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गणपति पूजा समारोह के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के आवास पर गए थे और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वो तस्वीरें अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट की गयीं जिसमें वो सीजेआई चंद्रचूड़ के घर पर पूजा करते हुए देखे जा सकते हैं।
इस घटना पर काफी विवाद पैदा हुआ, वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएसजी) इंदिरा जयसिंह ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण के साथ समझौता किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) से इस घटना की निंदा करने का आग्रह किया।

