लखनऊ। यूपी की सियासत पूरी तरह अब चरम पर आ गई है। चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बीच बड़े चेहरों के चुनाव लड़ने को लेकर अटकलबाजी होनी शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दावा किया जा रहा है कि धार्मिक नगरी अयोध्या या मथुरा से वो सियासी ताल ठोंक सकते हैं तो वहीं अखिलेश यादव को लेकर भी कवायदों का दौर शुरू हो गया है। जबकि, पश्चिमी यूपी में अखिलेश के सबसे बड़े सहयोगी रालोद मुखिया जयंत चौधरी ने ऐलान किया है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे। जबकि अखिलेश के साथ गठबंधन के वो प्रमुख चेहरों में से एक हैं। किसानों के आंदोलन के बाद जयंत चौधरी का कद भी काफी बढ़ गया है। मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्धनगर, बागपत, गाजियाबाद आदि वो जिले हैं जहां पर जयंत का खासा प्रभाव माना जा रहा है। वहीं गठबंधन के दौरान भी उनको अच्छी सीटें मिलने की पूरी संभावनाएं हैं। इस बीच अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने को लेकर समर्थकों ने कैंपेनिंग करनी शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि चुनाव लड़ने के सवाल पर अखिलेश पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी जो निर्णय लेगी वो मानेंगे। जहां से कहेगी वहां से चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में अब यह लगभग साफ हो गया है कि अखिलेश यादव चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश के चुनाव लड़ने की अटकलों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि वो मैनपुरी से चुनाव लड़ सकते हैं। जहां से मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ते रहे हैं। हालांकि अभी तक तस्वीर साफ नहीं हुई है।
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कन्नौज से आए समर्थकों ने की नारेबाजी
शनिवार को अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कन्नौज जिले से आए समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए अखिलेश से अपील की कि वो वहां से किसी विधानसभा से चुनाव लड़ें। गौरतलब है कि कन्नौज को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है। अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव यहां से सांसद रह चुकी हैं। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। समर्थकों का कहना है कि अखिलेश यादव को कन्नौज की धरती से चुनाव लड़ना चाहिए। क्योंकि यह समाजवादियों का गढ़ रहा है। हालांकि उनकी नारेबाजी को देखते हुए सपा के पदाधिकारियों ने उनको चुप करा दिया लेकिन कार्यकर्ता अखिलेश तक अपना संदेश पहुंचाने में कामयाब रहे।
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अखिलेश नहीं लड़े हैं कभी विधानसभा का चुनाव
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के मुखिया अखिलेश यादव कभी भी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। साल 2000 में वो कन्नौज लोकसभा से पहली बार 26 साल की उम्र में उपचुनाव जीते, उसके बाद वह खाद्य, नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण संबंधी समिति के सदस्य रहे। इसके बाद 2004 में वो लोकसभा के आमचुनाव में जीते और कई कमेटियों के सदस्य रहे। तीसरी बार लगातार 2009 में उन्होंने एक बार फिर लोकसभा का चुनाव जीता। हालांकि इसके तीन साल बाद यूपी में सपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी और इसका श्रेय अखिलेश को मिला और इनाम स्वरूप वो सीएम बने। इस दौरान वो एमएलसी रहे। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आजमगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अगर अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव लड़ते हैं तो ऐसा मौका पहली बार होगा।

