उपेक्षा के चलते खंडहर बन गया संक्रामक रोग अस्पताल
नाकारा सिस्टम की बानगी है अस्पताल की दरकती दीवारें
मेरठ। ऐसा नहीं कि हमारे पास संक्रामक रोगों से लड़ने के लिये साधन नहीं है। मगर हमारे अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते हमारे संसाधन व्यर्थ होते जा रहे हैं। इसकी बानगी देखनी है तो आईये सूरजकुंड स्थित नगर निगम के संक्रामक रोग अस्पताल में जो उपेक्षा के चलते आज खंडहर में तब्दील हो गया है। शहर के बीचो-बीच स्थित इस संक्रामक रोग अस्पताल की दरकती दीवारें हमारे नाकारा सिस्टम को दर्शा रही हैं। आज यदि यह संक्रामक रोग अस्पताल चालू हालात में होता तो कोरोना महामारी के दौरान यह मरीजों के उपचार में सहयोग कर सकता था।

मेरठ नगर के वासियों को मलेरिया, हैजा जैसे संक्रामक रोगों से बचाने के लिये नगर निगम ने सूरजकुंड रोड पर संक्रामक रोग अस्पताल बनवाया था। उद्देश्य था कि संक्रामक रोगों से लोगों के जीवन की रक्षा की जा सके। मगर नगर निगम अधिकारियोें की उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों के अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेने के कारण आज यह संक्रामक रोग अस्पताल खंडहर में तब्दील हो चुका है। यहां की दकरती दीवारें न जाने कब धाराशायी हो जायें यह खतरा बना रहता है। यहां उपचार की बात करना तो दूर इस इलाके में रहने वाले लोगों को भी यह मालूम नहीं है कि यहां कोई संक्रामक रोग अस्पताल है भी। बस यहां टूटी-फूटी दीवारों पर लटका एक पुराना बोर्ड इस बात की गवाही देता है कि यह संक्रामक रोग अस्पताल की इमारत है।

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हमारे अधिकारी और जनप्रतिनिधि अक्सर संसाधनों की कमी का रोना रोते रहते हैं मगर सच यह है कि नाकारा हो चुके सिस्टम के पास अपने संसाधनों को संभालने और उनका उपयोग जनहित में करने की न तो सोच है और न ही हिम्मत। क्योंकि ऐसा न होता तो अरबों रुपये की जमीन पर शहर के बीचो-बीच स्थित संक्रामक रोग अस्पताल खंडहर में तब्दील न हुआ होता।
मेरठ महानगर को जरूरत है ऐसे अधिकारियों की जो वर्तमान में मौजूद संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने के लिये सार्थक प्रयास करें। ताकि जनता को संक्रामक रोगों से राहत मिल सके और उनका जीवन सुरक्षित हो सके।

