INS Vikrant: भारतीय नौसेना को कल मिलेगा पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘आईएनएस विक्रांत’, इन खूबियों से है लैस

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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना को कल  दो सितंबर को अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘आईएनएस विक्रांत’ मिल जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी खुद इस विमानवाहक पोत को देश सेवा के लिए नौसेना को सौंपेंगे। विक्रांत भारत में बना सबसे बड़ा युद्धपोत बताया जा रहा है। नौसेना में इस कैरियर के शामिल होने के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। जिनके पास खुद विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता उपलब्ध है। सबसे पहली गौर करने वाली बात यह है कि भारत में बने आईएनएस विक्रांत में उपयोग सभी चीजें स्वदेशी नहीं हैं। यानी कुछ कलपुर्जे विदेशों से मंगाए हैं। हालांकि, नौसेना के अनुसार पूरे प्रोजेक्ट का 76 फीसदी हिस्सा देश में मौजूद संसाधनों से बना है।  विक्रांत के निर्माण के लिए जरूरी युद्धपोत स्तर की स्टील को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने तैयार किया है। इस स्टील को तैयार करने में भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला की मदद ली गई। बताया गया है कि सेल के पास  युद्धपोत स्तर की स्टील बनाने की जो क्षमता है, वह देश में काफी मदद करेगी। 

नौसेना के अनुसार युद्धपोत की जो चीजें स्वदेशी हैं। उनमें 23 हजार टन स्पेशल स्टील, 2.5 हजार टन स्टील, 2500 किलोमीटर इलेक्ट्रिक केबल के अलावा 150 किमी के बराबर पाइप और 2000 वॉल्व हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर में शामिल हल बोट्स, एयर कंडीशनिंग से लेकर रेफ्रिजरेशन प्लांट्स, स्टेयरिंग से जुड़े कलपुर्जे भी देश में बने हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत के कई बड़े औद्योगिक निर्माता भी एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण से जुड़े रहे हैं। इनमें भारत इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, किर्लोस्कर, एलएंडटी , केल्ट्रॉन, जीआरएसई, वार्टसिला इंडिया शामिल रहे। इसके अलावा 100 से ज्यादा लघु उद्योगों ने इस पोत पर लगे स्वदेशी उपकरणों और मशीनरी के निर्माण में पूरी मदद की है।

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नौसेना का कहना है कि युद्धपोत को बनाने में 50 भारतीय उत्पादक शामिल थे। इसके निर्माण के दौरान हर दिन दो हजार भारतीयों को रोजगार मिला। जबकि 40,000 अन्य को परोक्ष तरीके से प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिला था। इस पोत को बनाने में कुल 23 हजार करोड़ रुपये की लागत का 80-85 प्रतिशत वापस भारतीय अर्थव्यवस्था में लगा दिया गया। कोचिन शिपयार्ड में बने आईएनएस विक्रांत की लंबाई 262 मीटर बताई है। इसकी चौड़ाई करीब 62 मीटर है। यह 59 मीटर ऊंचा और बीम 62 मीटर है। युद्धपोत में 14 डेक हैं और 1700 से अधिक क्रू को रखने के लिए 2300 कंपार्टमेंट्स हैं। इनमें महिला अधिकारियों के लिए अलग से केबिन बनाए हैं। इसके अलावा इसमें आईसीयू से लेकर चिकित्सा से जुड़ी सेवाएं और वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं हैं। आईएनएस विक्रांत का वजन करीब 40 हजार टन है। आईएनएस विक्रांत की असली ताकत समुद्र में सामने आती है। जहां अधिकतम स्पीड 28 नॉट्स तक है। यानी 51 किमी प्रतिघंटा। इसकी सामान्य गति 18 नॉट्स यानी 33 किमी प्रतिघंटा है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर एक बार में 7500 नॉटिकल मील यानी 13,000 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।

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