मुझे उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा- कंगना रनौत

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मुझे उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा- कंगना रनौत

  • कंगना पहुंची राजभवन, राज्यपाल से की मुलाकात
  • अभिनेत्री को भाजपा के समर्थन सेे शिवसेना भी परेशान

महाराष्ट्र । महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कंगना और शिवसेना के बीच चल रही तनातनी की ही चर्चाएं हो रही हैं। अपने बेलौस अंदाज केेे लिये जानी जाती कंगना रनौत ने शिवसेना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

आज कंगना रनौत महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने राजभवन पहुंची तो यह प्रकरण एक बार फिर गरमा गया है। माना जा रहा है कि इस विवाद को शिवसेना ने शुरू में हल्के में लिया था। मगर भाजपा के कंगना को दिये जा रहे समर्थन के बाद अब यह प्रकरण शिवसेना और प्रदेश की सत्ता में उसकी समर्थक पार्टियों के लिये परेशानी का कारण बन गया है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक बयान में कंगना रनौत ने मुंबई की तुलना पीओके से की थी। जिसके बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें मुंबई आने पर देख लेने की धमकी दी थी। मगर कंगना को केंद्र सरकार से सुरक्षा मिली और वह बेखौफ मुंबई लौटी।

इसी बीच बीएमसी ने कंगना के दफ्तर में अवैध निर्माण किये जाने का हवाला देते हुए वहां तोड़फोड़ की थी। जिसके बाद कंगना ने शिवसेना पर तीखे आरोप लगाते हुए बीएमसी की कार्रवाई के लिये उसे जिम्मेदार ठहराया था।

इसी तनातनी के माहौल में कंगना रनौत के महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने राजभवन पहुंचने पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद कंगना रनौत ने कहा, मेरे साथ जो अन्याय हुआ, उसपर बात की।

वो हमारे गार्जियन हैं। मुझे उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा। मैं राजनेता नहीं हूं और राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। आज अचानक से मेरे साथ अभद्र व्यवहार हुआ है। राज्यपाल ने मुझसे बेटी की तरह मुलाकात की।

वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक दल भी आमने-सामने आ गये हैं। एक ओर जहां महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने लोगों को भरोसा दिया कि वह राजनीतिक संकट से भी लड़ेंगे। वहीं शिवसेना नेता संजय राउत का आरोप है कि यह विवाद जल्द होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए खड़ा किया जा रहा है।

दूसरी ओर महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना पर निशाना साधते हुए कहा था कि पूरी सरकारी मशीनरी कंगना के खिलाफ लड़ाई में शामिल है। वे जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कंगना का पीछा छोड़ कर राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति से निपटने पर ध्यान देना चाहिए।

गौरतलब है कि एक ओर जहां शिवसेना कंगना को लगातार घेरने का प्रयास कर रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी उनको सुरक्षा प्रदान करने से लेकर खुलेआम समर्थन में उतरने से भी परहेज नहीं कर रही है। कुल मिलाकर अब यह प्रकरण महाराष्ट्र की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन गया है। यह तय है कि इस विवाद का कुछ न कुछ असर राजनीति में अवश्य पड़ेगा।

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