Sunil Sharma
खुश तो बहुत होंगे हुजूर आप और हो भी क्यों ना? सारे अखबार, सारे न्यूज चैनल आपके शिलान्यास या विपक्ष की नजर से देखें तो चुनावी रैली के गुणगान कर रहे हैं। जहां तक देखो वहीं तक लोगों की भीड़ फोटो/वीडियो में नजर आ रही है। अपना जादू एक बार फिर जनता पर चलता देख आपका दिल तो बांसो बल्लियां उछल रहा होगा। लेकिन हुजूर उन्हीं अखबारों, उन्हीं न्यूज चैनलों में खबर यह भी है कि यूपी में कोरोना तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है। मेरठ में मात्र 4 दिनों में नये मिलने वाले कोरोना मरीजों की संख्या ढाई गुनी हो गई है। तो हुजूर आप तो अक्सर टीवी पर आते हैं, लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने की अपील करते हैं। कोरोना से डरने की नहीं उस से सावधान रहने की बात करते हैं। आपका यह अंदाज हमें बेहद पसंद आता है। हमें लगता है कि देश का मुखिया खुद देश की जनता की इतनी चिंता कर रहा है। लोगों को कोरोना से बचाने के लिए दिन-रात सोचता है। हमें विश्वास होता है कि कोई और चाहे हो या ना हो मगर आप हमें जरूर हमें करोना से बचाएंगे।

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मगर हुजूर यह विश्वास अब डगमगा रहा है। और डगमगाए भी क्यों ना? जब आप खुद लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने की अपील करते हैं तो आपको मेरठ में इतनी भीड़ बुलाने की आवश्यकता क्या थी? हुजूर यह तो सिर्फ एक शिलान्यास था जिसे आप दिल्ली में बैठे-बैठे बटन दबाकर भी कर सकते थे। तो इतना लाव-लश्कर, मुख्यमंत्री से लेकर सांसद-विधायकों की फौज इकट्ठा करने की जरूरत क्या थी? और हुजूर यह जो लाखों की भीड़ आपने बुलाया तो कोरोना के दौर में क्या ऐसा करना जरूरी था? और हुजूर, टीवी-रेडियो से इतर क्या आपने किसी कार्यक्रम या रैली के मंच से लोगों से मास्क पहनने और भीड़ से दूर रहने की अपील की है क्या? माफ कीजियेगा हुजूर आप तो खुद मंच पर पहुंचते ही मास्क उतार देते हैं। अब देश का मुखिया ही सार्वजनिक मंच पर मास्क उतार देगा तो भला पब्लिक से मास्क पहनने को कहेगा कौन?

हुजूर हम मानते हैं कि चुनाव का दौर है और वोट आपकी पार्टी को भी चाहिए। मगर हुजूर आप इस देश के मुखिया भी हैं और कोरोना से मुकाबला के लिए आप हर संभव कदम उठाने का दावा भी करते हैं। तो लोगों को भी भीड़ से दूर रखना और उन्हें मास्क पहने के लिए प्रेरित करना आपके लिये सिर्फ कथनी नहीं करनी भी होना चाहिए था। हुजूर रैलियां-सभाएं तो आपकी पार्टी वैसे ही बहुत कर रही है। लेकिन कम से कम आप तो एक उदाहरण पेश करते। आप लोगों की जो चिंता जाहिर करते हैं उसे वास्तविकता के धरातल पर उतारने की शुरुआत तो करते।

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हुजूर इस रैली से आपकी पार्टी को वोट कितने मिलेंगे यह तो हमें नहीं मालूम, लेकिन कितने लोग अपने साथ कोरोना लेकर गये हैं यह तो शायद आपको भी नहीं मालूम होगा। और हुजूर आप तो सदा ही अलग पार्टी और अलग तरह का नेता होने का दावा करते हैं। लेकिन आप भी यदि और नेताओं की तरह भीड़ जुटायेंगे तो आप भी उन्हीं नेताओं में शुमार हो जायेंगे न? हुजूर मन की बातें कहने या टीवी पर आकर सलाह-मशवरा देने की बजाय एक बार आपने ऐसा कदम उठाया होता की लोगों की भीड़ भी नहीं जुटती और जनता तक आपके द्वारा किए गए कार्यों का गुणगान भी पहुंच जाता। तो आप आज खुद एक उदाहरण बन जाते और आपकी पार्टी की एक अलग छवि बनती। लेकिन माफ कीजिएगा हुजूर, आप और आपकी पार्टी भी औरों की तरह ही निकले, वही भीड़ जुटाई-कोरोना फैलाऊ…

