होम आइसोलेट मरीजों से कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका

मेरठ रीजनहोम आइसोलेट मरीजों से कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका

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10 दिन में 15 हजार मरीज मिलेे, अधिकतर किये होम आइसोलेट
अस्पतालों में नये कोरोना मरीज भर्ती करने के लिये नहीं है जगह
दवा की किट और भगवान भरोसे हैं गंभीर कोरोना संक्रमित

सुनील शर्मा

मेरठ। स्थिति नियंत्रण में है के सरकारी दावों के विपरित मेरठ में कोरोना संक्रमण के कारण गंभीर स्थिति में आ चुके मरीज भी स्वास्थ विभाग की ओर से दी जा रही दवाओं की किट और भगवान के भरोसे हैं। जनपद में पिछले 10 दिनों में 15 हजार कोरोना संक्रमित मिले हैं मगर अस्पतालों में जगह न मिल पाने के कारण अधिकतर मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने के लिये कहा गया है। गांवों में तो लगभग सभी मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। स्वास्थ विभाग के आंकड़े भले ही यह साबित कर देंगे की होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की स्थिति गंभीर नहीं है। मगर सच यह है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों में भी अनेक संक्रमित ऐसे हैं जिनकी स्थिति गंभीर हो चुकी है। मगर अस्पतालों में जगह न मिल पाने के कारण वह घर में ही रहने को मजबूर हैं।

मेरठ में कोविड अस्पतालों की हालात किसी से छिपी नहीं है। एक अदद बेड के लिये लोग जानकारों से लेकर नेताओं, अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। अस्पतालों के बाहर बेड के इंतजार में लोग दम तोड़ रहे हैं। अस्पतालों में जगह न होने के कारण स्वास्थ विभाग भी मजबूरी में अधिक से अधिक लोगों को होम आइसोलेशन की सलाह दे रहा है। हालांकि स्वास्थ्थ विभाग की माने तो होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की स्थिति कम गंभीर है। कोरोना संक्रमित पाये गये लोगों को दवा की किट और कुछ सलाहें देकर स्वास्थ विभाग अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहा है। मगर होम आइसोलेशन में रहने वाले अनेक मरीज गंभीर स्थिति में होने के बावजूद उपयुक्त उपचार से वंचित हैं। कारण यह कि अस्पतालों में उनको भर्ती करने के लिये जगह ही नहीं है। अनेक मरीजों की हालत गंभीर होने के बाद उन्हें ऑक्सीजन की भी सुविधा मुहैया न होने के कारण जान गंवानी पड़ी है। सरकारी में जगह नहीं तो निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर जान बचे न बचे मगर जेब खाली हो जाने की गारंटी है। इसके बावजूद निजी अस्पताल भी बेहद सिफारिशों के बाद ही मरीज को भर्ती कर रहे हैं। अस्पतालों के चक्कर काटते मरीज एंबुलेंस में ही दम तोड़ रहे हैं। वहीं अनेक मरीज ऐसे हैं जो गंभीर हालत होने के बावजूद अस्पताल में जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं।

वीआईपी कल्चर और अस्पतालों के पैकेज के कारण बेड हैं फुल
निजी कोविड अस्पतालों में भर्ती अधिकतर मरीजों का हेल्थ इंश्योरेंस होने के कारण उनको हर दिन बढ़ने वाले अस्पताल के बिल की चिंता नहीं होती। ऐसे में जिस मरीज को दो या तीन दिन में स्वास्थ लाभ हो जाता है वह भी अधिक से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहना चाहता है ताकि वह पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर ही घर जाये। वहीं अनेक अस्पताल ऐसे भी हैं जो निश्चित रकम में मरीज को 7 से लेेकर 14 दिन तक का पैकेज देते हैं। ऐसे पैकेज लेने वाले मरीज को जल्द स्वस्थ हो जाने के बावजूद अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। ऐसे में जरूरतमंद मरीज को अस्पताल में जगह नहीं मिल पाती और कुछ मरीज वह जरूरत न होने पर भी बेड खाली नहीं करते। अस्पताल पैकेज देते हुए मरीज की हालत भी देखते हैं और कम गंभीर मरीज को ही अपने यहां अधिक से अधिक दिनों के लिये भर्ती करते हैं। इससे उनका खर्चा तो पूरा निकल जाता है मगर उनके अस्पताल में मृत्यु दर काफी कम हो जाती है।

होम आइसोलेट मरीज से संक्रमण फैलने का होता है खतरा
कोरोना संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेट करना स्वास्थ विभाग की मजबूरी है मगर ऐसे मरीजो से कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। कारण यह कि घर में आइसोेलेट अधिकतर मरीज कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं कर पाते। घर में रहने के दौरान जैसे ही वह खुद को थोड़ा स्वस्थ महसूस करते हैं वह परिवार जनों से मिलना-जुलना शुरू कर देते हैं। कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए बगैर उनके संपर्क में आने वाले परिवार के सदस्योें में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। यह भी देखने में आया है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज चंद दिनों के बाद बाहर घुुमना-फिरना या लोगोें से मिलना शुरू कर देते हैं। वह खुद के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी और लोगों को नहीं देते जिससे लोग उनके संपर्क में आने के दौरान पर्याप्त दूरी नहीं बनाते। खासकर गांवों में लोग कोरोना संक्रमण की ज्यादा परवाह नहीं करते और होम आइसोलेशन की अवधि को पूरा करना उन्हें बेमानी लगता है। ऐसे लोगों के कारण संक्रमण और तेजी से फैलता है। जागरूकता के अभाव में होम आइसोलेट मरीजों का आंकड़ा बढ़ना कोरोना के खतरे को और बढ़ा रहा है। जरूरी है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज को जागरूक करने के साथ उन पर निगरानी रखने की भी व्यवस्था की जाये। वहीं परिवार के सदस्यों को भी कोविड गाइडलाइन का पालन करने और रोग की गंभीरता के बारे में बताया जाये। कोरोना मरीज को अलग कमरे मेें रखने संक्रमित से पर्याप्त दूरी बनाये रखने, उसको खाना देेते समय मास्क पहनने और खुद में कोरोना का कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ विभाग को सूचित करने के बारे में जागरूक करना होगा। कोरोना संक्रमित के पास-पड़ोस में रहने वालों को भी मरीज के बारे में बताया जाये ताकि वह उससे खुद को दूर रख सके और उसकी गतिविधियों पर निगाह रखते हुए स्वास्थ विभाग को सूचित भी कर सके।

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