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राम मंदिर विवाद: 1992 में हुआ बाबरी विध्वंस, जिसने पूरे देश को हिला दिया था

उत्तर प्रदेशराम मंदिर विवाद: 1992 में हुआ बाबरी विध्वंस, जिसने पूरे देश को...

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History of ram mandir buzinessbytes series 6: 22 जनवरी 24 को अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। करीब 500 वर्षों के इंतजार के बाद रामलला का मंदिर तैयार हुआ है। सैकडों सालों के इस सफर को तय करना सरल नहीं रहा। राम मंदिर मंदिर और मस्जिद विवाद में कई ऐसे पड़ाव आए, जिन्होंने देश को हिला कर रख दिया। इन्हीं में से एक दिन 6 दिसंबर 1992 का था। यह घटना इतिहास में आज भी लोगों के जहां में उठती है तो दिल दहल जाता है। यह वह दिन था जब लाखों की तादाद में कार सेवक अयोध्या पहुंचे थे। उनके प्रण था कि वह बाबरी मस्जिद को गिराकरही दम लेंगे। उस दिन कार सेवकों के आक्रोश को संभालना बहुत मुश्किल था। जय श्री राम के उद्घोष के साथ 12 बजे तक लाखों कार सेवक विवादित ढांचे पर चढ़ गए। उन्होंने उसे तोड़ना शुरू कर दिया। दोपहर के 3 बजे तक मस्जिद का बायां गुंबद गिरा दिया गया। शाम करीब 4.41 मिनट पर गर्भगृह का गुंबद गिरा। धीरे-धीरे मस्जिद के तीन गुंबद गिरा दिए गए। इसी बाबरी विध्वंस के साथ ही देश में नया विवाद शुरू हो गया था। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि इस दिन कोई घर ऐसा नहीं था जहां से कार सेवक ना निकले हो।

उमा भारती ने दिए थे नारे
बाबरी विध्वंस के साथ ही उमा भारती ने इस दिन दो नारे दिए थे। जिसमें पहला ‘ राम नाम सत्य है ‘ जबकि दूसरा नारा था ‘ एक धक्का दो और बाबरी मस्जिद तोड़ दो ‘। तारों के उद्घोषों के साथ कर सेवकों के भीतर अलग ही उत्साह रहा था। कार सेवक मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा इन नारों के साथ जोड़ लगातार आगे बढ़ रहे थे। इसी दिन 1990 में मारे गए कोठारी बंधुओ के माता-पिता को भी भीड़ के सामने लाया गया था। इतिहासकार बताते हैं कि उमा भारती भीड़ में उत्साह भरते हुए कह रही थीं कि उनके बेटों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। इसी के साथ कार सेवक लगातार जय श्री राम, जय श्री राम के नारों के साथ विवादित ढांचे को गिराने में लगे हुए थे। उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा और आचार्य धर्मेंद्र भाषण दे रहे थे। वह बार-बार आवाज लगा रहे थे कि जिन्होंने भी प्रसाद नहीं लिया है वह प्रसाद लेकर जाएं। प्रसाद का मतलब बाबरी विवादित ढांचे की ईंटों से थ। इसी के साथ ही उमा भारती लगातार कर सेवकों को जमीन समतल किए जाने के लिए कह रही थी। कार सेवक पूरे जोश के साथ जुटे हुए थे। वह पूरा इलाका समतल करना चाहते थे।

हिल गई थी दिल्ली
6 दिसंबर को जहां विवादित ढांचा गिरा था वहीं पूरा दिल्ली भी हिल चुका था। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक कल्याण सिंह इस मामले में उसी दिन इस्तीफा देना चाहते थे। उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी से फोन पर यह बात भी कही थी। लेकिन, आडवाणी ने उन्हें यह कहते हुए रोक लिया था कि कुछ देर रुक जाइए। यदि आपने इस्तीफा दिया तो तुरंत उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग जाएगा। आर्मी, नेवी जैसे केंद्रीय बल मोर्चे पर आ जाएंगे। जिससे स्थिति बेकाबू हो सकती है। यह भी कहा जाता है कि कल्याण सिंह मस्जिद गिराए जाने की योजना से अनभिज्ञ थे और इसी के प्रति उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। हालांकि कल्याण सिंह ने बाद में इस्तीफा दे दिया था और 7 दिसंबर को केंद्र की पीवी नरसिंह राव की सरकार ने यूपी सरकार को बर्खास्त भी कर दिया था।

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