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राम मंदिर का इतिहास:77 से अधिक युद्ध, सैकड़ों मौत, भगवान को मुक्त करवाने की दास्तां

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history of ram mandir buzinessbytes series 3:22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। 500 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद राम लला का भव्य मंदिर तैयार हो रहा है। प्रभु राम की मुक्ति के लिए अब तक 77 से अधिक युद्ध इतिहास में दर्ज किए जा चुके हैं। लाखों लोगों के प्राणों की आहुति हुई। 1527- 28 ईस्वी में जब मंदिर तोड़ा गया तब सबसे पहले पंडित देवीदीन पांडे ने विरोध शुरू किया। इतिहासकारों के मुताबिक उनके नेतृत्व में युद्ध हुआ। उनकी मृत्यु के बाद रणविजय सिंह ने कुछ हजार सैनिकों के साथ प्रभु को मुक्त करवाने का प्रयास किया। लेकिन उनकी हार हुई। मंदिर तोड़ने के समय उस पर सिद्ध महात्मा श्यामानंद जी महाराज का अधिकार था। उस वक्त राजा महताब सिंह ने भी मंदिर बचाने के लिए युद्ध किया था। लखनऊ गजेटियर किताब के मुताबिक एक लाख 74 हजार हिंदुओं को मारकर मीर बाकी मंदिर ध्वस्त करने में सफल हुआ था।

हुमायूं ने मस्जिद के लिए बहाया खून


रणविजय सिंह के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी जयराज कुमारी ने जन्मभूमि की रक्षा का बीड़ा उठाया। उन्होंने सैकड़ों महिला योध्याओ के साथ रामलला के लिए युद्ध किया। उन्होंने संन्यासियों की सेना बनाकर लगातार मुगलों से युद्ध चालू रखा। तब तक हुमायूं मुगलों की कमान संभाल चुका था। उसकी शाही सेना के सामने रानी और सन्यासी टिक नहीं सके। उनकी सेना शहीद हो गई। इसके बाद जन्मभूमि पर फिर मुगलों ने अपना कब्जा कर लिया।

अकबर ने कूटनीति से बनवाया टाट का मंदिर

इतिहासकारों के मुताबिक राम लला को मुक्त करवाने के लिए हिंदुओं का संघर्ष लगातार जारी था। अकबर काल तक आते आते शाही सेना का भी काफी नुकसान हो चुका था। उन्होंने बीरबल और टोडरमल की सलाह पर चबूतरे पर पहली बार छोटा सा मंदिर बनवा दिया। 3 फीट के मंदिर को खस की टाट से तैयार करवाया गया था। कुछ दिन तक राम जन्म भूमि पर खूनी संघर्ष थम गया। शाहजहां ने भी इसी कूटनीति को बनाए रखा और कुछ समय के लिए शांति बनी रही।

औरंगजेब ने फिर तोड़े मंदिर, बहाया रक्त

मंदिर के लिए संघर्ष थामने का नाम नहीं ले रहा था। मुगल शासन जब औरंगजेब के हाथ में आया तब एक बार फिर खूनी संघर्ष शुरू हो गया। औरंगजेब हिंदुओं के सफाए के लिए मंदिर तुड़वा रहा था। उसने अवध यानी अयोध्या पर लगातार हमले करवा कर सभी मंदिरों को तुड़वा दिया। उसी समय वैष्णव दास ने राम जन्मभूमि के लिए संघर्ष किया। 30 बार आक्रमण कर उन्होंने राम लला जन्मस्थान को बचाने के प्रयास किए लेकिन सभी असफल हुए। इसके बाद नसीरुद्दीन हैदर के समय फिर बड़े आक्रमण हुए। इस बार असंख्य हिंदू मारे गए। हिंदू हार रहे थे लेकिन वीर चिमटाधारी साधुओं की सेना ने मोर्चा संभाला और शाही सेना को हराना शुरू कर दिया। राम जन्म भूमि पर एक बाद फिर हिंदुओं का कब्जा हो गया लेकिन यह अधिक समय तक कायम नहीं रह सका। मुगलों की सेना ने दोबारा से हमले शुरू किए। अब फिर से जन्मभूमि को मुगलों ने अपने कब्जे में ले लिया। इस लड़ाई में सैकड़ो हिंदू मारे गए थे।

ब्रिटिश हुकूमत से हारे हिंदू

राम मंदिर को वापस पाने के लिए हिंदुओं का संघर्ष जारी था 1857 की क्रांति के दौरान बहादुरशाह ज़फ़र का शासन था तब रामचरण दास ने मौलवी आमिर अली के साथ एक बार फिर से जन्म भूमि को वापस पाने के प्रयास किया, लेकिन इस बार ब्रिटिश हुकूमत ने हिंदुओं को आगे बढ़ने नहीं दिया। कट्टरपंथी मुसलमानों ने मंदिर का विरोध किया तब 1858 में अंग्रेजों ने रामचरण दास और आमिर अली दोनों को एक साथ फांसी पर लटका दिया।

अगली सीरीज में पढ़िए …आजाद भारत में मुसलमानों को कैसे मिला विवादित स्थल से दूर रहने का आदेश, कैसे मंदिर परिसर में मिली थी मूर्तियां…..