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ज्ञानवापी मामला : 33 साल से कोर्ट में लड़ रहे प्रभु विशेश्वर, नंदी कर रहे इंतजार

उत्तर प्रदेशज्ञानवापी मामला : 33 साल से कोर्ट में लड़ रहे प्रभु विशेश्वर,...

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बिज़नेस बाइट्स सीरीज 2 (History Of Gyanwapi Buzinessbytes Series 2 )

पारुल सिंघल

history Of gyanwapi buzinessbytes series 2 :ज्ञानवापी परिसर विवाद मामले में 1991 में पहली बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। इस वर्ष हरिहर पांडे, राम रंग शर्मा और सोमनाथ व्यास ने प्रभु की ओर से याचिका दायर की थी। तब से लेकर अब तक यानी 33 साल से विश्वेवर भगवान अपनी जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मामले में लगातार हिंदू मुस्लिम पक्ष द्वारा याचिका दायर कर अपनी अपनी दलीलें पेश की जा रही हैं। हिंदू पक्ष की याचिका के कुछ वर्ष बाद अंजुमान इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सिविल कोर्ट पर मामले की सुनवाई पर रोक हेतु याचिका दायर की गई थी। जिसके एवज में हाई कोर्ट ने सिविल कोर्ट पर रोक लगाई और 22 साल तक यह केस यूं ही पड़ा रहा।

ये भी पढ़े: ज्ञानवापी मामला: क्या है विवाद, क्यों कोर्ट पहुंचे बाबा विश्वेश्वर

ऐसे मिली सर्वे की मंजूरी


2019 में फिर भगवान वाराणसी कोर्ट पहुंचे। इस बार उनकी ओर से विजय एस रस्तौगी ने ज्ञान वापी परिसर की एएसआई द्वारा सर्वे करवाने की मांग को लेकर याचिका दायर की। एक वर्ष बाद उच्च अदालत ने वाराणसी कोर्ट पर रोक लगाई। इसी वर्ष विजय रस्तौगी ने फिर वाराणसी कोर्ट का रुख किया, मामले की दोबारा सुनवाई की अपील की। 2021 में सिविल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए परिसर के सर्वे की इजाजत दे दी।

महिलाओं ने मांगी थी कोर्ट से पूजा की अनुमति

मस्जिद कमेटी ने इसका विरोध किया और उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया। जहां निचली अदालत के फैसले पर फिर रोक लगी। इस मामले में कुछ ही महीने बाद एक और मोड़ तब आया जब पांच महिलाओं ने वाराणसी सिविल जज के समक्ष एक याचिका दायर की। उन्होंने मस्जिद के बराबर में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में नियमित पूजन दर्शन की इजाजत मांगी। अगस्त में की गई याचिका इसी वर्ष सितंबर में स्वीकार हुई। हाल ही में जिसको लेकर फैसला सुनाया गया और हिंदुओ को पूजा की अनुमति दे दी गई।

सुप्रीम कोर्ट लगाई थी रोक


परिसर के सर्वे को लेकर अप्रैल 2022 में निचली अदालत का फैसला आया। इसमें मस्जिद का सर्वे करवाने और उसकी वीडियो ग्राफी करवाए जाने का फैसला सुनाया गया। मस्जिद कमेटी ने एक बार फिर उच्च अदालत का रुख किया लेकिन इस बार उनकीअपील खारिज कर दी गई। 2022 में ही हिंदुओ ने विवादित परिसर को सील करने की अपील की जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मस्जिद कमेटी ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने पहले ही शिवलिंग मिलने के दावे वाली जगह को सील करने और नमाज़ अदा करने पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए थे। बाद में वुजुखाने को सील करने का फैसला सुनाते हुए नमाज़ जारी रखने की अनुमति प्रदान की। इस परिसर के सर्वे के आदेश भी दिए गए।

आगे पढ़िए: 1991 का वह कानून जिसकी वजह से मंदिर बनाने में अड़ रहा है पेंच

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