- स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों में तेजी से बढ़ रही डबल विजन की समस्या
- संक्रमण के दौर में एक्टिविटी कम होने से बच्चों का बढ़ रहा है वजन
अमित बिश्नोई
कोरोना संक्रमण के दौर में फिजिकल एक्टीविटी कम हो जाने से आपका बच्चा दिन भर लैपटाॅप, मोबाइल, कंप्यूटर पर समय बिताता दिखे। हसीं-मजाक, शरारत करने के बजाये वह गुमसुम रहने लगा हो। अचानक से उसका वजन बढ़ने लगा हो या उसको देखने में समस्या आने लगी हो तो इसे बिल्कुल भी लापरवाही से न लें।
यदि समय पर ध्यान नहीं दिया तो आपका बच्चा डिप्रेशन व अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता हैै। क्योंकि स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चे बहुत सी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में बच्चे पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है। पढ़े बिजनेस बाइट्स की एक खास रिपोर्ट…
बीते 6 महीनों में शायद ही कोई ऐसा है जिसकी जीवन शैली में परिवर्तन न हुआ हो। यदि बच्चों की बात करें तो उनकी जीवनशैली पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। खेलकूद की उम्र में बच्चे कोरोना संक्रमण की वजह से घर में रहने को मजबूर है। फिजिकल एक्टिविटी कम होने से बच्चों का अधिकतर समय इलेक्ट्रोनिक डिवाइस यानी कंप्यूटर, लैपटाॅप और मोबाइल पर बीतने लगा है। वहीं ऑनलाइन क्लास अटेंड करने के चलते उनका स्क्रीन टाइन काफी बढ़ गया है। ऐसे में बच्चों में नोमोफाबिया, डबल विजन, वजन बढ़ाना जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। वहीं ऐसे बच्चों को इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का प्रयोग करने से रोकने पर वह डिप्रेशन जैसी स्थिति में आ रहे हैं जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
क्या है नोमोफाबिया?
अब आपके जेहन में सवाल होगा कि यह नोमोफाबिया क्या होता है। जब किसी व्यक्ति के पास मोबाइल न हो जिसकी वजह से वह बेचैन होने लगे उसे नोमोफाबिया कहा जाता है। पहले के मुकाबले कोरोनाकाल में बच्चों में नोमोफाबिया की समस्या तीन गुना तक बढ़ गई है। बच्चों के बिहेवियर को देखकर लगता है कि वह मोबाइल के बिना बेहद उदास, बेचैन हो गया है। यदि आपके बच्चे में भी ऐसे लक्षण दिखें तो उसको नोमोफाबिया होने की संभावना हो सकती है।
क्या है डबल विजन?
लंबे समय तक बच्चे स्क्रीन देखते रहते हैं जिससे उनकी आंखें ड्राई होने लगती हैं। पलकें न झपकाने से परेशानी और बढ़ती है और बच्चों को सिरदर्द की शिकायत होने लगती है। उनकी आंखों से पानी आता है और धीरे-धीरे धुंधला दिखने लगता है। इसी को डबल विजन की समस्या कहा जाता है। कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम यानी सीवीएस, कंप्यूटर या मोबाइल से होने वाली परेशानियों का बड़ा नाम हैं।
बैठने की गलत पोजिशन से बढ़ रही समस्या
कोरोना संक्रमण के दौर में स्कूल छोटी स्क्रीन में बदल गया है। फिजिकल एक्टिविटीज न होने के कारण बच्चों में वेट गेन के साथ कब्ज के केस बढ़ गए हैं। स्कूल में तो तय वक्त पर संतुलित डाइट मिल जाती है। लेकिन घर पर नखरों की वजह से बच्चे कम खाना खा रहे हैं। साथ ही उनका सायकोलाॅजिकल, आॅप्थमोलाॅजिकल रूटीन भी बिगड़ गया है। यह समस्याएं बच्चों में स्लीपिंग डिसआॅर्डर समेत कई बीमारियां को जन्म दे सकती हैं।
क्या कर सकते हैं पेरेंट्स?
- बच्चों को समय देकर कुछ वक्त उनके साथ गुजारें
- बच्चों के साथ बात कर उनकी दिनचर्या तय करें
- बच्चों को बेवजह डांटने की बजाये उनकी समस्याओं को समझें
- उनकी फिजिकल एक्टीविटी को बढ़ायें, उनके साथ एक्सरसाइज करें
- रस्सी कूद और डांस का सहारा ले सकते हैं
- सोने से कम से कम 1 घंटे पहले बच्चों का मोबाइल देखना बंद कर दें

