New GST Rule: जीएसटी विभाग आईटीसी पर नया नियम लागू करने की तैयारी में है। इस नियम को जीएसटी विभाग जल्द मंजूरी दे सकता है। अगर ये नियम लागू होता है तो इन बदले नियम के बाद अगर कोई कारोबारी अलग से ITC क्लेम करता है तो उसे GSTR-1 और GSTR-3B में अंतर के बारे में भी बताना होगा। ये नियम दोनों ITC में अंतर 20 प्रतिशत या 25 लाख रुपए से अधिक होने पर लागू होगा।
GST काउंसिल जल्द Input टैक्स क्रेडिट पर नया नियम लाने की तैयारी में है। इस नए नियम के आने के बाद अगर कोई व्यापारी अलग से इनपुट टैक्स क्रेडिट(ITC) क्लेम करता है तो tax authority को इसके कारणों के बारे में जानकारी देनी होगी।
कमेटी ने की सिफारिश
इसे लेकर एक लॉ कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में केंद्र और राज्य के टैक्स अधिकारी शामिल किए गए हैं। कमेटी की तरफ से राय दी गई है। GSTR-3 बी रिटर्न में प्राप्त ITC ऑटो जनरेटेड स्टेटमेंट CSTR 2बी में मिली आईटीसी में अंतर तय सीमा से अधिक है तो रजिस्टर्ड व्यक्ति को इसके अंतर के बारे में जानकारी देनी होगी। या अतिरिक्त ITC को ब्याज के साथ वापस करना होगा। कमेटी की ओर से सिफारिश की है ये नियम तभी लागू होगा, जब ITC में अंतर 20 प्रतिशत से अधिक और 25 लाख से अधिक का होगा।
फैसला 11 जुलाई को
जीएसटी परिषद अब इस सिफारिश पर फैसला 11 जुलाई को होने वाली बैठक में करेगी। मौजूदा समय में कारोबारी GSTR 3बी में टैक्स का भुगतान करते समय अपनी जीएसटी देनदारी की भरपाई के लिए आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भुगतान किए टैक्स का उपयोग करते हैं। जिन्हें आमतौर पर आईटीसी कहते हैं।
जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी में टैक्स देनदारी अंतर 25 लाख रुपए तय सीमा या 20 प्रतिशत से अधिक का होता है तो कारोबारियों को इसका अंतर बताना होगा या फिर टैक्स को जमा करना होगा। इसी के साथ जीएसटी नेटवर्क की तरफ से जीएसटीआर-2B फॉर्म को बनाया जा रहा है, जो आईटीसी स्टेटमेंट का ऑटो ड्राफ्ट होगा। ये टैक्सपेयर्स को उसके आपूर्तिकार्ता के प्रत्येक दस्तावेज पर आईटीसी उपलब्धता और अनउपलब्धता के बारे में बताएगा।

