भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 10 सरकारी (पीएसयू) कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर लगभग 16,500 करोड़ रुपये की कमाई की है। हालांकि, यह आंकड़ा सरकार की आंतरिक हिस्सेदारी बिक्री के 18,000 करोड़ रुपये के आंकड़े से 9 फीसदी कम है. आम चुनाव की वजह से केंद्र सरकार ने अपने निजीकरण के उद्देश्य को फिलहाल रोक दिया है।
पिछले फाइनेंसियल ईयर में सरकार ने किसी भी बड़ी सरकारी कंपनी का डिसइनवेस्टमेंट नहीं किया. बल्कि कई छोटे-छोटे लेन-देन किए गए हैं. इसमें OFS आदि शामिल हैं और सरकार ने Coal India, Rail Vikas Nigam Limited, SVJN, HUDCO, IRFC, IREDA, IRCON International और NLC India में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचकर पैसे जुटाए हैं।
यह लगातार चौथी बार है जब सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई है. पिछले एक दशक के शासनकाल में मोदी सरकार केवल दो बार ही अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा कर पाई है। आखिरी बार सरकार ने 2019 में विनिवेश लक्ष्य हासिल किया था. रिपोर्ट के अनुसार इसी वजह से सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश का कोई लक्ष्य तय नहीं किया है.