शादी करने वाली लडकियों से न करने वाली लडकीयाँ है ज्यादा खुश

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बेटा, समय से शादी कर लो, बाद में तुम्हें कोई नहीं मिलेगा! 23-24 की उम्र से लोग ये सलाह लेना शुरू कर देते हैं। अगर घर की शादीशुदा औरतें नहीं कहतीं तो मोहल्ले की आंटियां जरूर बोलती हैं. अब इन महिलाओं को कौन समझाए जो अपनी खुशी और आराम की परवाह किए बिना अपने पति और बच्चों की खुशी और सुविधा के लिए सुबह से शाम तक काम करती हैं कि अकेले रहने का सुख क्या होता है। वैसे ये बात कई कुंवारी लड़कियों को भी नहीं पता होती है. इसलिए अच्छे पति की चाह में वे किसी के भी साथ शादी के बंधन में बंधने को तैयार हो जाती हैं।

अगर आप भी 30 की उम्र में पति और बच्चे के बिना गुजारा कर रही हैं और इस बात से चिंतित हैं कि आने वाले साल कैसे होंगे तो यह लेख आपके लिए है। यहां हम आपको एक अध्ययन के बारे में बता रहे हैं जिसमें यह पाया गया है कि शादीशुदा महिलाओं की तुलना में अकेली महिलाएं ज्यादा खुश रहती हैं।

अमेरिकन टाइम यूज़ सर्वे (एटीयूएस) ने विवाहित, अविवाहित, अलग, विधवा और तलाकशुदा व्यक्तियों के बीच खुशी और नाखुशी के स्तर की तुलना की और पाया कि अविवाहित लोग विवाहित लोगों की तुलना में कम दुखी हैं। वहीं, शादीशुदा लोगों ने खुशी के उच्च स्तर की सूचना तभी दी जब उनसे उनके साथी की मौजूदगी में सवाल पूछा गया।

पुरुषों को शादी के फायदे

विशेषज्ञों का कहना है कि शादी के बाद पुरुष ‘शांत’ हो जाते हैं, कम जोखिम उठाते हैं और अधिक पैसा कमाने के लिए प्रेरित होते हैं। इतना ही नहीं, शादीशुदा पुरुष अपनी सेहत का भी बेहतर ख्याल रखते हैं, जिससे उनकी उम्र लंबी होती है।

महिलाओं पर क्या असर होता है

शादी के बाद महिलाओं की सेहत ख़राब होने लगती है। क्योंकि वह पति, बच्चे और घर से जुड़े कामों में खुद को पूरी तरह भूल जाती हैं। इसके साथ ही उन्हें अपने करियर और सपनों से भी समझौता करना पड़ता है, जो मानसिक रूप से उनके लिए बहुत कष्टदायक होता है। इसलिए देखा गया है कि जो महिलाएं शादी नहीं करतीं वो ज्यादा खुश और स्वस्थ रहती हैं।

एक अन्य अध्ययन का नतीजा भी ऐसा ही है

मार्केटिंग इंटेलिजेंस कंपनी मिंटेल द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में एकल महिलाओं से कुछ प्रश्न पूछे गए। इससे यह निष्कर्ष निकला कि उपस्थित 61 प्रतिशत महिलाएँ अकेले रहकर खुश थीं और इनमें से 75 प्रतिशत महिलाएँ किसी साथी की तलाश भी नहीं करना चाहती थीं।

अध्ययन के परिणामों का सारांश

इन अध्ययनों के निष्कर्षों से पता चलता है कि समय बदल रहा है और इसका असर लोगों के शादी करने के फैसले पर पड़ रहा है। जहां एक समय लड़कियों के लिए शादी बेहद अहम मानी जाती थी। वहीं, अब लड़कियां अकेले में भी खुलकर अपनी जिंदगी जीना पसंद कर रही हैं। अब उनकी खुशियां शादी, पति और बच्चों तक ही सीमित नहीं हैं।

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