राहुल गाँधी को फिर से कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाने के प्रस्तावों के बीच अब धीरे धीरे ये साफ़ होता जा रहा है कि गाँधी फैमिली के वफादारों और उस परिवार के खिलाफ बगावती तेवर वालों के बीच नए अध्यक्ष के लिए होने वाले चुनाव में मुकाबला होगा। सोनिया गाँधी से मुलाकात के बाद यह साफ़ हो गया कि बागी तेवर वाले शशि थरूर G-23 गुट की नुमाइंदगी करेंगे जबकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत गाँधी फैमिली के वफादार की हैसियत से प्रतिनिधित्व करेंगे।
जानकारी के अनुसार अशोक गहलोत अगले सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं, हालाँकि उनके राज्य से राहुल गाँधी को फिरसे अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव भी पास हुआ है जो CWC को भेजा गया है, ऐसे ही प्रस्ताव छत्तीसगढ़ और गुजरात से भी पास हुए हैं. वहीँ शशि थरूर ने कल कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इजाज़त मांगी. ख़बरों के अनुसार सोनिया ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए हर कोई आज़ाद है. सोनिया गाँधी से अनुमति मिलने के बाद थरूर का अब चुनाव के मैदान में उतरना तय माना जा रहा है.
वहीँ मुख्यमंत्री की कुर्सी को पहली पसंद मानने वाले अशोक गेहलोत को भी न चाहते हुए भी अपनी वफ़ादारी का सबूत देने के लिए चुनाव में उतरना ही पड़ेगा, हालाँकि अभी तक उन्होंने अपनी सीएम की कुर्सी बचाने की उम्मीद छोड़ी नहीं है और न सिर्फ राजस्थान कांग्रेस से राहुल गाँधी के लिए प्रस्ताव पास कराया बल्कि गुजरात, जहाँ के वो चुनावी इंचार्ज हैं वहां से भी प्रस्ताव पास कराकर दिल्ली भेजा है, साथ ही छतीसगढ़ से भी ऐसा ही प्रस्ताव पास कराया है, दरअसल अशोक गेहलोत नहीं चाहते कि सचिन पायलट को राजस्थान सीएम की कुर्सी मिले और राजस्थान भविष्य के लिए उनके हाथ से निकल जाय.

