प्रियंका का चिढ़ना

उत्तराखंडप्रियंका का चिढ़ना

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प्रियंका का चिढ़ना

अमित बिश्‍नोई

क्या कोई राजनेता सवालों से चिढ़कर खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकता, लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेता ऐसा कर सकते हैं. पत्रकारों का काम नेता से सवाल करना होता है और नेताओं का काम उन सवालों को संयम से सुनना और उन्हें अपने हिसाब से जवाब देना। सवाल भी बिलकुल जायज़ था,हर पार्टी का किसी भी प्रदेश के चुनाव में कोई न कोई मुख्यमंत्री पद का चेहरा होता है, अक्सर पार्टियां उसका एलान चुनाव से पहले ही कर देती हैं और अगर नहीं करती हैं तो कयासों और सवालों का दौर चलता है. सवाल पूछे जाते हैं, नेता अपने ढंग से उसका जवाब देते हैं लेकिन किसी ने चिढ़कर इस तरह का जवाब दिया हो शायद पहली बार चुना है।

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बात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की हो रही है जिन्होंने कल ही दिल्ली में मीडिया के सामने उत्तर प्रदेश के चुनाव में खुद को कांग्रेस का चेहरा बताया था और उलटे सवाल भी कर दिया था कि क्या यूपी में मेरे अलावा कोई और भी चेहरा आपको नज़र आता है. प्रियंका ने मान लिया था कि पार्टी का चेहरा वहीँ हैं. फिर 24 घंटों के अंदर वह यू टर्न मारती हुई कहती हैं कि वह तो मैंने चिढ़कर कह दिया था।

सवालों से भागना किसी अच्छे नेता की निशानी नहीं, राजनीति में आप जिस सवाल से भागते हैं वह आपके पीछे भागता है. सवालों को लेकर आप सेलेक्टिव नहीं हो सकते कि इस सवाल का जवाब देना है, इस सवाल पर चुप रहना है और इस सवाल से चिढ़ना हैं. फिर इस सवाल में चिढ़ने वाली या परेशान होने वाली बात ही कौन सी थी. भले ही सभी को मालूम है कि लाख ज़ोर लगाने के बाद भी यूपी में कांग्रेस सरकार बनाने के आसपास भी नहीं पहुँच सकती, कम से कम इस चुनाव में तो यह निश्चितही नहीं लेकिन जब आपकी पार्टी इतनी जोरशोर से चुनाव लड़ रही है तो सीएम का सवाल तो बनता ही है।

राजनीति में अपने बयानों को लेकर राजनेता यू टर्न मरते रहते हैं. अपने दिए बयानों पर वह कई तरह के अतार्किक तर्क भी गढ़ते हैं, बयान को तोड़ने मरोड़ने की बात करते हैं मगर यह कभी नहीं कहते कि यह बात मैंने सवालों से चिढ़कर कही थी. पार्टी का कोई छुटभय्या नेता इस तरह की बात करे तो उसे समझा भी जा सकता है मगर राजनीति का गंभीर चेहरा बनीं प्रियंका गाँधी जब सवालों से चिढ़ने की बात करेंगी तो पार्टी के लिए सन्देश अच्छा नहीं जाएगा।

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कल यूपी चुनाव को लेकर “गंभीर विधान” जारी करने के समय इस घटनात्मक बयान पर कांग्रेस महासचिव के इस अनोखे यू टर्न पर अब सियासत होना लाज़मी है. बयान आना शुरू भी हो गए हैं. हो सकता है कि प्रियंका के इस यू टर्न का यूपी की राजनीति या वोटरों पर कोई प्रभाव न दिखाई दे लेकिन प्रियंका वाड्रा की इमेज पर प्रभाव ज़रूर पड़ेगा। यहाँ मैं यह बताना ज़रूर चाहूंगा कि लोग राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी में फर्क मानते हैं, इसलिए प्रियंका राहुल न बनें तो बेहतर है।

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