आगरा की सीमा के पास धौलपुर में टिड्डी दल देखा गया है.इस टिड्डी दल की कानपुर में भी मूवमेंट की संभावना है. इसलिए कानपुर के लोगों से जिला प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि रात में खिड़की, दरवाजे बंद करके ही सोएं. क्योंकि इनके देर रात तक कानपुर में आने की संभावना बनी हुई है. एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की ओर से दवाओं का छिड़काव कराया गया है. कीटनाशक दवाओं का प्रतिकूल प्रभाव मनुष्यों और पशुओं पर हो सकता है. इसलिए डीएम डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने सभी से सतर्क रहने की अपील की है.
ये टिड्डी दल क्या है?
टिड्डी दल छोटे कीड़ों का झुंड होता है. इस झुंड में लाखों कीड़े शामिल होते हैं. कीड़ों का ये झुंड उत्तर पूर्वी अफ्रीका में तैयार होता है. ये ग्रासहॉपर समुदाय का एक सदस्य होता है. ये टिड्डे अपना झुंड बनाकर एक इलाके से दूसरे इलाके जाते हैं.आमतौर पर ये कीड़े अगर कम संख्या में हो तो खेती को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते. लेकिन जब ये लाखों की तादाद मेें झुंड में होते हैं तो तबाही मचा देते हैं.
लाखों कीड़े कहां से आ जाते हैं?
जब इन कीड़ों को सूटेब्ल कंडीशन जैसे हरियाली, बारिश वगैरह मिलती है. तो उनके दिमाग में सेरेटॉनिन नाम का रसायन कुछ बदलाव लाता है. इसके बाद वो एकदम से प्रजनन करने लगते हैं और उनकी तादाद में बहुत तेजी से या यू कहें की विस्फोटक बढ़ोत्तरी होती है.वो अपने झुंड जबरदस्त तरीके से बढ़ाते जाते हैं. फिर ये झुंड हरियाली की खोज में आगे बढ़ने लगता है.झुंड में बढ़ते हुए ये टिड्डी दल रास्ते में आने वाली फसलों, पौधों , पेड़ों को चट कर जाते हैं. एग्रीकल्चर के साइंटिस्ट बताते हैं कि ये कीड़े रेगिस्तानी इलाके में पैदा होते हैं और हरियाली वाले इलाकों का पीछा करते हुए आगे बढ़ते हैं. ये उसी दिशा में आगे बढ़ते हैं जिस दिशा में हवा चल रही होती है. मतलब ये हवा की दिशा के साथ सफर करते है.

