मेरठ। डालमिया ग्रुप की लैंड मार्क प्रॉपर्टी डेवलपमेंट कंपनी के खिलाफ मेरठ के एडिशनल सिविल जज सीनियर डिवीजन ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे को स्टेट केस की तरह दर्ज करने का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि यह आदेश अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के एम एन राय द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया है। डालमिया ग्रुप की इस कंपनी पर शेयर ट्रांसफर के नाम पर करीब 53 करोड़ 14 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर हड़पने का आरोप है। जिसकी एफआईआर करीब 3 साल पहले 16 फरवरी 2019 को मेरठ के टीपी नगर थाने में दर्ज कराई गई थी।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टीपी नगर थाने की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट को भी डिस्मिस करने को कहा है। अदालत में दाखिल की गई केस में बताया गया है कि अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और आरोपी लैंड मार्क टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के बीच 13 सितंबर 2004 को एक संयुक्त एग्रीमेंट हुआ था। इस करार के अनुसार दोनों कंपनियां मेरठ के करनाल और गाजियाबाद की 246 एकड़ जमीन पर कॉलोनी बनाने का काम करना चाहती थी।
लेकिन 8 साल बाद यानी 21 दिसंबर 2012 को दोनों ही कंपनियों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया कि लैंडमार्क ग्रुप अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड समूह से बाहर निकल जाएगा और अपने 50 फ़ीसदी शेयर अंसल समूह को दे देगा। लेकिन लैंडमार्क प्रॉपर्टी डेवलपमेंट एंड कंपनी के डायरेक्टरों पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने सिर्फ 4 फ़ीसदी शेयर ही दिए हैं।
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वह इस मामले में जब अंसल प्रॉपर्टीज ने जांच की तो उसे पता चला कि जो 46 फ़ीसदी का शेयर है वह किसी बैंक के पास गिरवी के तौर पर बंधक रखा हुआ है जिसको किसी भी शर्त पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। आरोप है कि इसके बावजूद गलत तरीके से शेयर परचेज एग्रीमेंट के दस्तावेज तैयार किए गए और 53 करोड ₹1400000 हड़प लिए गए।
इस मामले की सुनवाई करते हुए एडीशनल सिविल जज सीनियर डिवीजन राकेश अग्रवाल ने डायरेक्टर गौरव डालमिया, मृदु डालमिया, पद्मा डालमिया, आभा डालमिया और रघु हरि डालमिया के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 190 (1) ख के तहत आईपीसी की धारा 420, 406, 120 बी के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। साथ ही मुकदमा चलाने का आदेश देते हुए इसे स्टेट केस की भांति दर्ज करने का भी आदेश जारी किया है।

