लखनऊ। यूपी कांग्रेस 26 जनवरी से ‘हाथ से हाथ जोड़ो’ अभियान शुरू करने जा रही है। अभियान के साथ कांग्रेस हर जिले में ‘खास वर्गों’ का सम्मेलन भी करेगी। कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव 2024 से पहले संगठन को विस्तार देने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। सम्मेलनों में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी मुख्य भूमिका में होंगे। जबकि जिला व शहर इकाइयां इनकी मदद करेंगी।
पिछले चुनाव में काफी खराब प्रदर्शन
पिछले लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहे थे। प्रदेश की एकमात्र सीट रायबरेली से कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी जीत दर्ज कर पाई थी। इससे पहले 1977 के आम चुनाव में यूपी में कांग्रेस की ऐसी स्थिति रही थी। जब यूपी से कांग्रेस का एक भी प्रत्याशी नहीं जीत सका था। इंदिरा गांधी खुद रायबरेली से और संजय गांधी अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गए थे। कांग्रेस रणनीतिकारों की माने तो संगठन के फैलाव से यूपी में पैर जमा सकते हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इसके लिए जिलों में खास वर्गों के सम्मेलन आयोजन की जरूरत है। जिससे कांग्रेस का पुख्ता आधार तैयार किया जा सके।
दूसरे और तीसरे स्थान वाली सीटों पर खास फोकस
पिछले तीन चुनाव में जिन सीटों पर कांग्रेस पहले या दूसरे स्थान पर थी। वहां इस तरह के सम्मेलनों के लिए खास आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा प्रांतीय अध्यक्षों से कहा है कि वे प्रभार वाले जिलों में संगठन को मजबूत करने के लिए प्रयास करें। सजातीय सम्मेलनों के लिए प्रदेश के किसी हिस्से में कार्यक्रम तय कर सकते हैं। स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर किसी प्रकार का अंतरविरोध न पैदा हों, इसके लिए जिला व शहर अध्यक्षों से सम्मेलनों में मुख्य भूमिका में न रहने के लिए कहा है। वो सहयोगी की भूमिका में रहेंगे। जिससे सभी वर्गोें में स्वीकार्यता बनी रहे।

