प्रत्याशी को मसीहा की दरकार,खामोश मतदाताओं ने बढ़ाई प्रत्याशियों की बेचैनी,पत्नियों ने संभाला मोर्चा

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प्रत्याशी को मसीहा की दरकार,खामोश मतदाताओं ने बढ़ाई प्रत्याशियों की बेचैनी,पत्नियों ने संभाला मोर्चा

मेरठ। तीसरे चरण का मतदान समाप्त हो चुका है। लेकिन पहले चरण से तीसरे चरण के बाद अब पड़ाव चौथे चरण की ओर है। लेकिन इन प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अब तक के तीन पड़ावों में राजनीति में हवाबाजी की भूमिका काफी गजब की रही। इस बार के चुनाव में न तो किसी की लहर है और न किसी दल की पक्ष में हवा चल रही है। मतदाताओं की खामोशी पर प्रत्याशी काफी बेचैन हैं। बता दें कि वर्ष 2017 के सि चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हवा के सहारे भाजपा ने मैदान मारा था। उस दौरान तो भाजपा के टिकट पर तमाम ऐसे प्रत्याशी भी चुनाव जीत गए थे। जिनकी कभी कोई उम्मीद भी नहीं कर सकता था। चुनाव जीतने के बाद भी इन पांच सालों में न तो ये अपनी पहचान बना पाए और न कोई काम क्षेत्र में किया। भाजपा के ऐसे हवाबाजों की इस बार हवा खराब है। चुनावी रैलियों में भी अब तक न कोई रंग दिखा है और न कोई जलवा रोड शो के दौरान नजर आया है। मतदाताओं के दरवाजे पर प्रत्याशी के दस्तक देते समय पसीना छूट रहा है।

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इस बार हर दल को मसीहा का इंतजार है। पश्चिमी उप्र से लेकर अवध और पूर्वांचल की राजनीति यूपी के राजनैतिक वजूद का रूख पलटने की कुवत रखते हैं। अब तीसरे चरण के बाद आने वाले चार चरण का चुनाव काफी चुनौतीपूर्ण है। कायदे में इन चार चरणों में ही दलों की असली परीक्षा होनी है। दल,बल,छल और बाहुबल का चुनाव अब इन चार चरणों में होना है। इसलिए हर प्रत्याशी केा चुनाव जीतने के लिए अब मसीहा की जरूरत है। इन चरणों में भाजपा के पास जहां प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के नाम का अस्त्र है वहीं दूसरी ओर सपा के पास एकमात्र अखिलेश यादव हैं। तो बसपा के पास मायावती के अलावा कुछ नहीं है। बचे चार चरणों के मतदाताओं में 30 फीसदी हवा के रुख को देखकर वोट करते हैं। इसकी शुरूआत तीसरे चरण से ही हो जाती है। तभी तो बेटे के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए दिग्गज नेता मुलायम सिंह को मैदान में उतारना पड़ा था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बार का चुनाव किसी एक चेहरे पर नहीं लड़ा जा रहा है। इस बार चुनावी शतरंज में भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा चातुकोणीय मुकाबले में खेल रही हैं। लेकिन खेल मुख्य रूप से दो के ही बीच दिखाई दे रहा है।

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अब यह विधानसभा चुनाव 2022 का चुनाव प्रधानी के चुनाव जैसा हो गया है। हर घर पर वोट की दस्तक प्रत्याशियों की बखौलाहट को बढ़ाती है। प्रत्याशियों केा ऐसा लग रहा हैं कि जिस दरवाजे पर नहीं पहुंचे उसका वोट नहीं मिलेगा। वहीं पूर्वाचल और अबध में अधिकांश सीटों पर चुनावी जंग में पत्नियां भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। हरैया और गोसाईगंज विधानसभा सीट पर प्रत्याशी पतियों की विधायकी बचाने को पत्नियां राजनीति के जंग ए मैदान में कूद पड़ी हैं।

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