बिजनेस बाइट्स स्पेशल – महाकुंभ से लौटे श्रद्धालुओं की कोरोना जांच, निगरानी आवश्यक

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बिजनेस बाइट्स स्पेशल – महाकुंभ से लौटे श्रद्धालुओं की कोरोना जांच, निगरानी आवश्यक

कुंभ मेले के दौरान पांच दिनों में 1700 नये कोरोना संक्रमित मिले
श्रद्धालुओं से लेकर साधु-संत तक हुए संक्रमित, आज जनता भी त्रस्त

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। हरिद्वार में चल रहा महाकुंभ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। महाकुंभ के अवसर पर पतित पावनी मां गंगे के पवित्र जल में स्नान कर पुण्य हासिल करने की कामना लिये श्रद्धालु महाकुंभ में पहुंचते हैं। मगर कोरोना संक्रमण के कारण आशंका जताई जा रही थी कि इस वर्ष हरिद्वार महाकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के कारण कोरोना संक्रमण न केवल हरिद्वार या उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में फैल सकता है। क्योंकि कुंभ मेले में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं से कोरोना संक्रमण फैलने या उनके कोरोना संक्रमण से प्रभावित होने की आशंका जताई गयी थी।

शुरूआती पाबंदियों के बाद उत्तराखंड में सीएम परिवर्तन के साथ कुंभ मेला आयोजन को लेकर लगायी गयीं पाबंदियों में भी परिवर्तन हुआ और पहले श्रद्धालुओं को हरिद्वार आने से रोकने का प्रयास कर रही सरकार खुद श्रद्धालुओं को कुंभ मेले में आने का निमंत्रण देती दिखी। हालांकि हाईकोर्ट के दखल और केंद्र सरकार की चेतावनी के बाद सरकार जागी मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आज हरिद्वार के साथ पूरा उत्तराखंड कोरोना की चपेट में है। 10 से 14 अप्रैल के बीच हरिद्वार में 1,701 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा महज कुछ हजार जांचों का नतीजा है। जबकि प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार कुंभ मेले में 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या के शाही स्नान पर 31 लाख से ज्यादा और मेष संक्रांति के शाही स्नान पर लगभग 14 लाख लोगों ने गंगा स्नान किया है। ऐसे में कोरोना संक्रमितों की वास्तविक संख्या का अनुुमान लगाने के प्रयास में ही दहशत होती है। इन हालातों में हरिद्वार महाकुंभ में गंगा स्नान कर अपने-अपने राज्यों में लौटे लोगों की कोरोना जांच और नियमित निगरानी करना बेहद आवश्यक है। अन्यथा यह श्रद्धालु सुपर स्प्रेडर बन कर कोरोना संक्रमण का प्रसार देश भर में तेज करने का माध्यम बन सकते हैं।

उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार ने कुंभ मेले पर कोरोना गाइडलाइन की पाबंदियां लगायी हुई थीं। श्रद्धालुओं को बिना कोविड नेगेटिव रिपोर्ट लाये उत्तराखंड में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। वहीं रेलवे से विशेष ट्रेने न चलाने, बसों का आवागमन कम करने जैसे अनेक कदम कोरोना के प्रसार को रोकने के लिये उठाये गये थे। मगर उत्तराखंड में परिवर्तन हुआ और तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो गये। सीएम पद संभालते ही तीरथ सिंह रावत ने पूर्व सीएम द्वारा कुुंभ मेले पर लगायी गयीं पाबंदियों को हटाते हुए श्रद्धालुओं को हरिद्वार आने का निमंत्रण देना शुरू कर दिया। कोविड नेगेटिव रिपोर्ट लाने की अनिवार्यता खत्म करते हुए यात्रियों को चेकिंग के नाम पर परेशान न करने के आदेश भी दिये गये। हालांकि हाईकोर्ट और केंद्र सरकार की सख्ती के बाद तीरथ सरकार ने कुंभ मेले में पाबंदिया फिर से लागू करने का ऐलान किया लेकिन वह सिर्फ खानापूर्ति साबित हुआ। हरिद्वार में पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के बीच सामाजिक दूरी की बात करना भी बेमानी था। वहीं मास्क पहनने की आवश्यकता भी लोगों को महसूस नहीं हो रही थी। ऐसे में पुलिस-प्रशासन सिर्फ श्रद्धालुओं के आने और जाने की व्यवस्था करने तक ही सीमित रहा।

लेकिन कुंभ मेला में कोरोना प्रसार की एक झलक सरकारी आंकड़े दर्शा रहे हैं जिनके अनुसार 10 से 14 अप्रैल के दौरान हरिद्वार में 1,701 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। असली चिंता इस बात की है कि यह आंकड़े महज चंद हजार जांचों का नतीजा है। विभिन्न अखाड़ों के तकरीबन दो दर्जन संत और 500 से अधिक श्रद्धालु भी संक्रमित पाये गये हैं। ऐसे में यदि 10 से 14 अप्रैल तक का आंकड़ा देखें तो 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या पर 31 लाख और मेष संक्रांति के शाही स्नान के स्नान पर बुधवार को लगभग 14 लाख लोगों ने महाकुंभ में गंगास्नान किया। ऐसे में श्रद्धालुओं का आंकड़ा लगभग 50 लाख तक पहुंचने की संभावना है।

इन 50 लाख श्रद्धालुओं मेें से अधिकतर लोग विभिन्न राज्यों से कुंभ क्षेत्र पहुंचे होंगे और स्नान कर अपने राज्यों को वापस भी लौट गये होंगे। ऐसे में जब इन सभी श्रद्धालुओं की जांच नहीं हुई जो करना संभव भी नहीं था तो इन लोगों का कोरोना संक्रमण लेकर आने या कोरोना संक्रमण साथ लेकर जाने की संभावना को दरकिनार नहीं किया जा सकता। गौरतलब हैं की हरिद्वार कुंभ मेले में कोरोना प्रभावित राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ आदि से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही। ऐसे मंे इन राज्यों से आये श्रद्धालुओं से कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका पूर्व में ही जताई जा रही थी। वहीं ऐसे राज्य और शहर जहां कोरोना का प्रसार अभी तेज नहीं हैं वहां हरिद्वार मेले से लौटने वाले संक्रमितों से कोरोना फैलने की खतरा बढ़ गया है।

निःसंदेह आस्था और विश्वास के प्रतीक महाकुंभ के आयोजन पर रोक नहीं लगायी जा सकती लेकिन कोरोना काल में इसको सीमित तो किया ही जा सकता था। साधु-संतों के अलावा अन्य श्रद्धालुओं को कुंभ मेले में आने से रोका जा सकता था। क्योंकि पहले ही यह आशंका विभिन्न मंचों से जाहिर की जा चुकी थी कि महाकुंभ के दौरान कोरोना का प्रसार और तेज हो सकता है तो सरकार को लोगोें की श्रद्धा का सम्मान करते हुए उनकी जीवन को सुरक्षित रखने का भी ध्यान रखना चाहिये था।

आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहेगा, आंकड़ों में खुद को पाक-साफ करने के प्रयास भी होते रहेंगे, सुरक्षित कुंभ के दावे भी किये जायेंगे लेकिन हकीकत पर पर्दा डालने से आप आलोचना से तो बच सकते हैं लेकिन लोगों की जान नहीं बचा सकते। वर्तमान परिस्थितियों में यह जरूर किया जा सकता है कि देश से सभी राज्यों में महाकुंभ से लौटे लोगों की कोरोना जांच और नियमित माॅनीटरिंग कराने के लिये उचित कदम उठाये जायें। सरकार वक्ती तौर पर कुछ समय के लिये उन्हें होम आइसोलेशन में रहने को कहे तो इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं का जीवन बचाया जा सकेगा बल्कि उनके संपर्क में आने वाले लोगों में कोरोना प्रसार होने से भी रोका जा सकेगा।

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