16 मई की रात 12 बजे तक सब साथ थे, साथ में रिपोर्ट तैयार कर रहे थे लेकिन 17 मई को सब बदल गया, ज्ञानव्यापी मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए अदालत द्वारा नियुक्त किये गए कोर्ट कमिश्नरों के मतभेद अदालत तक पहुंचे, बाकायदा जज साहब साहब से लिखित शिकायत दर्ज हुई और जज साहब ने उस शिकायत पर एक्शन भी ले लिया. जी हां आज वाराणसी की अदालत ने सर्वे टीम के एडवोकेट जनरल अजय मिश्र को मिस्कंडक्टिंग के आरोप में कमीशन से हटा दिया, और यह कार्रवाई एक अन्य कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह की शिकायत पर की. दिलचस्प बात यह रही कि इन्ही अजय मिश्र के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने पहले पक्षपात का आरोप लगाया था और इन्हें कमीशन से हटाए जाने की मांग की थी लेकिन तब इसी अदालत ने वह अर्ज़ी खारिज कर दी थी.
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विशाल सिंह ने किया धोखा
कमीशन से हटाए जाने के बाद अजय मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह पर धोखा देने का बड़ा आरोप लगाया। अजय मिश्रा ने कहा सबकुछ सही ढंग से चल रहा था, मैं अपना काम कर रहा था, वह अपना काम कर रहे थे. सर्वे का काम पूरा होने पर सभी लोग मिलकर रिपोर्ट तैयार कर रहे थे, कल रात 12 बजे तक मेरे घर पर ही थे. पता नहीं उन्हें मुझसे क्या समस्या आ गयी कि मेरे खिलाफ कोर्ट में इस तरह का आरोप लगा दिया।
मेरे खिलाफ साज़िश हुई
अजय मिश्रा ने कहा कि मुझे कमीशन से हटाए जाने का कोई अफ़सोस नहीं है लेकिन साथी वकील ने मेरे साथ जिस तरह का व्यवहार किया वह मेरे खिलाफ एक साज़िश थी, उन्होंने कहा कि मैं उस साज़िश को समझता हूँ लेकिन मामला कोर्ट में है इसलिए अभी कुछ नहीं बोलूंगा। यह पूछे जाने पर कि आपको जब कमीशन से हटा दिया गया है तो कमीशन की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेगा तो उन्होंने कहा नहीं ऐसा नहीं है.
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दूसरे के किये की सज़ा मुझे क्यों
उनके द्वारा कमीशन टीम में रखे गए फोटोग्राफर द्वारा अंदर की बातें, फोटो और वीडियो लीक किये जाने की बात पर उन्होंने कहा कि मीडिया वालों के चक्कर में आकर उसने ऐसा किया जिसका खामियाज़ा हमें भुगतना पड़ा, लेकिन उन्होंने सवाल भी उठाया कि किसी और ने अगर कुछ गलत काम किया तो उसका ज़िम्मेदार मैं कैसे हो गया.

