मेरठ। इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में बहुत खास होता जा रहा है। राजनैतिक दृष्टि से देखे तो कई ऐसे दिग्गज हैं जो होते हुए भी विधानसभा चुनावी मैदान से दूर हैं। सपा के कददावर नेता आजम खान जेल में बैठकर चुनाव लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर कभी सपा तो कभी बसपा की छत्रछाया में अपनी मुख्तारी कायम करने वाले बाहूबली मुख्तार अंसारी भी जेल में बंद हैं। पिछले 20 साल में यह पहला मौका है। जबकि मुख्तार अंसारी चुनावी मैदान से बाहर है। जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी ने अपनी मुख्तारी बेटे को सौंप दी है। अब उनका बेटा विधानसभा चुनाव में अपना भाग्य अजमा रहा है। मुख्तार अंसारी का बड़ा बेटा अब्बास अंसारी मऊ जिले की सदर विधानसभा से सपा गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में है। बेटे अब्बास अंसारी पर जहां पिता की राजनैतिक विरासत बचाने का दबाव है। वहीं दूसरी ओर राजनैतिक मैदान में भी खुद को सिद्ध करना है। मुख्तार के बेटे अब्बास ने सपा की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से नामांकन दाखिल कर दिया है। अब्बास का कहना है कि इस बार पिता विधायक मुख्तार अंसारी चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि वे खुद पिता की परंपरागत सीट पर उम्मीदवार है।
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बता दें कि मुख्तार अंसारी इस समय आपराधिक मामलो में प्रदेश की बांदा जेल में बंद हैं। सुभासपा ने मुख्ख्तार और उनके बेटे केा मऊ सदर विधानसभा से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। चुनाव लड़ने के लिए मुख्तार को कोर्ट से अनुमति भी मिल गई थी। लेकिन ऐन समय पर उन्होंने चुनाव लड़ने का इरादा बदल दिया और अपने पुत्र को अपनी राजनैतिक विरासत सौंप दी। बता दें कि मऊ विधानसभा सीट से मुख्तार अंसारी लगातार 2002 से विधायक बनते आ रहे हैं। उनके विधायक बनने और चुनाव लड़ने का भी किस्सा अजीब है। वे 2005 से लगातार जेल में हैं और उसके बाद भी 2007 के बाद 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव जेल में रहते हुए जीते। दिलचस्प बात है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में मऊ जिले की चार विधानसभा सीट में तीन में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। जबकि एकमात्र सीट भाजपा हारी थी। वह सीट भी मुख्तार अंसारी ने जीती थी बसपा के टिकट पर। मऊ जिले की सदर विधानसभा मुख्तार अंसारी के लिए 2017 तक अजेय बनी रही है।

