Rahul ने पोस्टर में सुराख तो कर ही दिया

आर्टिकल/इंटरव्यूRahul ने पोस्टर में सुराख तो कर ही दिया

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अमित बिश्नोई

कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। दुष्यंत कुमार का यह शेर कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा और राहुल गाँधी पर इन दिनों बिलकुल फिट बैठता है. सच में सुराख तो उस पोस्टर में हो चूका है जिसे भाजपा और संघ ने बनाया था और उसे पप्पू का नाम दिया था. उस पप्पू ने उस पोस्टर में सुराख तो कर दिया है और उस सुराख से रौशनी की एक किरण निकल रही है जो सोये हुए कांग्रेसियों के साथ ही आम लोगों को भी नींद से जगा रही है. बता रही है कि जो तुम नींद में सपना देख रहे हो दरअसल हकीकत उससे अलग है. उठो, जागो और देखो एक नया सवेरा सामने खड़ा है.

जब भारत जोड़ो यात्रा शुरू हुई थी तब भी इसे पप्पू के दिमाग़ की सनक बताया गया था. कहा जा रहा था कि गुजरात जैसे राज्य में चुनाव होने वाले हैं और राहुल यात्रा पर जा रहे हैं, तब यही बताया जा रहा था कि यह भागने की एक कोशिश है, राहुल में मोदी का सामना करने की हिम्मत नहीं। बहुत से लोगों का मानना था की कुछ ही दिन की यात्रा होगी और राहुल कांग्रेसियों को पैदल दौड़ाकर हेलीकाप्टर से निकल लेंगे। भाजपा और संघ भी इस यात्रा की नाकामी को लेकर पूरी तरह आशान्वित थे. लेकिन जैसे जैसे यात्रा आगे बढ़ी और राहुल गाँधी उसमें टिके रहे उसने देश में सभी को हैरत में डाल दिया, भाजपा को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। यात्रा बढ़ते बढ़ते अब कश्मीर के करीब यानि पंजाब पहुँच चुकी है.

भाजपा तो क्या भारत जोड़ो यात्रा में चलने वालो को हैरत होती है कि कन्याकुमारी से यात्रा कश्मीर के करीब पहुंच गयी है और वह भी बिना किसी बाधा के. राहुल गाँधी को लेकर जितनी भी आशंकाएं व्यक्त की जा रही थी सब की सब निर्मूल साबित हुई. गोदी मीडिया के तमाम प्रयासों के बावजूद भी यात्रा के चर्चे पूरे देश में हैं. लोगों को राहुल का एक नया रूप देखने को मिल रहा है, एक तपस्वी का. राहुल खुद को भी एक तपस्वी कहते हैं और हर उस व्यक्ति को तपस्वी मानते हैं जो तपस्या का सम्मान करता है. राहुल का लुक भी अब एक तपस्वी की तरह हो गया है, दाढ़ी भी किसी तपस्वी की तरह बढ़ गयी है, एक तपस्वी की तरह उनपर मौसम का भी कोई असर नहीं हो रहा है, बातें भी किसी तपस्वी की तरह ही कर रहे हैं. मंच से तो वो पहले भी मुखर रहते थे लेकिन अब उस मुखरता में आत्मविश्वास का पुट अधिक है.

इस यात्रा से सबसे बड़ी बात तो यह निकल कर आयी है कांग्रेसियों का राहुल में भरोसा तो बढ़ा ही है आम लोगों में भी यहाँ तक विरोधी पार्टियों में एक नया नज़रिया पैदा हुआ है. समान सोच की जो पार्टियां पहले कांग्रेस से दूरी बनाये रखना चाहती थी अब उन्हें कांग्रेस के साथ खड़े होने या दिखने में कोई परहेज़ नहीं है. और यह बहुत बड़ी बात है, इस यात्रा ने राहुल गाँधी की इमेज को इतना बदल दिया है कि दूसरी पार्टियों को भी राहुल गाँधी का नेतृत्व स्वीकारने में कोई हर्ज नज़र नहीं आता. कह सकते हैं कि यह नया बदलाव 2024 में भाजपा के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है. यही वजह है कि भाजपा इस यात्रा को लेकर बहुत बेचैन है।

भाजपा को यह हरगिज़ नहीं मालूम था कि भारत जोड़ो यात्रा ऐसा भी रूप ले सकती है. हालाँकि उसके आई टी सेल के ट्रोल ब्रिगेड, भाजपा के मंत्री और संत्री सबने इस यात्रा को लेकर क्या क्या नहीं कहा , इस यात्रा को बदनाम करने की हर संभव कोशिश की लेकिन राहुल गाँधी ने अकेले ही इन हमलों का सामना किया और न सिर्फ सामना किया बल्कि मुंह तोड़ जवाब दिया। अब जबकि भारत जोड़ो यात्रा अपने अंतिम चरण में है और अपने गंतव्य यानि श्रीनगर के लाल चौक के काफी करीब पहुँच चुकी है भाजपा और परेशान हो उठी है. परेशानी यह है कि वो अगर इस यात्रा को अब किसी बहाने रोकती है तो और भी उल्टा असर पड़ेगा। हालाँकि ऐसा नहीं कि उसने कोशिश नहीं की. यात्रा के बीच में कोरोना को लेकर यह माहौल बनाने की कोशिश की गयी कि इससे देश में कोरोना फैल सकता है लेकिन यह कोशिश भी बेकार गयी. भाजपा जानती है कि राहुल गाँधी जब 3500 किलोमीटर पैदल चलकर लाल चौक पर तिरंगा फहराएंगे तो उसका क्या सन्देश जायेगा। आज दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो रही है, संभवतः इस यात्रा से बनने वाली नई परिस्थितियों पर भी भाजपा मंथन ज़रूर करेगी। फिलहाल तो इस यात्रा ने एक दिशा तो दे ही दी है अब देखना है कि यात्रा के बाद इस दिशा पर कितना आगे बढ़ा जायेगा और कैसे आगे बढ़ा जायेगा। आप कह सकते हैं कि इस यात्रा के माध्यम से खेत की जुताई तो अच्छी तरह से हो गयी है, अब उसमें अच्छे से बीज डालने और उसकी देखभाल करने की ज़रुरत है क्योंकि फसल तो तब ही लहलहाएगी।

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