अमित बिश्नोई
गठबंधन की राजनीति अब ऐसे मोड़ पर पहुँच गयी है कि गठबंधन वाली पार्टियों के लिए परेशानियां खड़ी हो रही हैं, उसकी वजह है कि एक ही गठबंधन में कई गठबंधन हैं और इन गठबंधनों की गांठें आपस में उलझी हुई हैं, खासकर इंडिया गठबंधन की परेशानियां कुछ ज़्यादा हैं, जो समस्याएं इंडिया गठबंधन में हैं उस तरह की समस्याएं NDA में नहीं हैं. INDIA गठबंधन के अंदर हर राज्य का अलग गठबंधन है यही वजह है कि कहीं पर किसी सहयोगी से गठबंधन है तो कहीं पर किसी दूसरे सहयोगी से लेकिन समस्या ये है इंडिया ब्लॉक की हर पार्टी हर राज्य में अपना प्रतिनिधित्व चाहती है. इसी गठबंधन में आम आदमी पार्टी भी है और समाजवादी पार्टी भी है. दोनों फर्क सिर्फ इतना है कि आम आदमी पार्टी थोड़ा कठोर है जबकि समाजवादी पार्टी थोड़ा लचीला रुख रखने वाली पार्टी है, खासकर उसके पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव एडजस्ट करने वाले नेताओं में जाने जाते हैं लेकिन अरविन्द केजरीवाल ऐसे नहीं हैं यही वजह है कि जहाँ पर उनके हिसाब से गठबंधन नहीं होता वहां वो गठबंधन नहीं करते और गठबंधन पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं. फिर चाहे गठबंधन को नुक्सान ही क्यों न पहुँच रहा हो लेकिन अखिलेश यादव इतना सख्त रवैया नहीं अपनाते।
अब हरियाणा विधानसभा चुनाव की बात ही ले लीजिये, मनमाफिक समझौता न होने पर आम आदमी पार्टी ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए जिसका नुक्सान इंडिया गठबंधन की मुख्य सहयोगी कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ा. आम आदमी पार्टी को कोई सीट तो नहीं मिली मगर डेढ़ प्रतिशत वोट ज़रूर मिल गया. वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा, कांग्रेस से मामूली रूप से आगे रही जिसकी वजह से उसकी सीटें बढ़ गयीं और उसने अप्रत्याशित तौर पर तीसरी बार सरकार बना ली, यहाँ पर अगर AAP का डेढ़ प्रतिशत वोट कांग्रेस को गठबंधन करने पर मिल जाता तो कहानी बदल सकती थी. हरियाणा में अखिलेश यादव भी चुनाव लड़ना चाह रहे थे, मगर कांग्रेस की जीत के चांसेस को देखते हुए हटने का फैसला किया। अखिलेश चाहते तो हरियाणा में भी जम्मू कश्मीर की तरह अपने उम्मीदवार उतार सकते थे लेकिन अखिलेश ने यहाँ पर कांग्रेस की राह में रोड़े न अटकाने का फैसला किया। दरअसल अखिलेश दूसरे राज्यों में चुनाव इसलिए लड़ना चाह रहे हैं या लड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना है और ये तभी संभव है कि उसके पास अनिवार्य मत प्रतिशत और स्वीकार्यता हो जो सिर्फ उत्तर प्रदेश में रहकर नहीं मिल सकती।
ऐसा भी नहीं है कि अन्य राज्यों में समाजवादी पार्टी की कोई पहचान नहीं हैं. मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो या फिर उत्तराखंड और राजस्थान। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में तो उसके विधायक भी थे. यही वजह थी कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस से या फिर कहिये कमलनाथ से बात न बनने के बाद काफी सीटों पर सपा के उम्मीवार उतारे थे जिन्होंने कांग्रेस पार्टी को काफी नुक्सान पहुँचाया था, हालाँकि अखिलेश सिर्फ वही सीटें मांग रहे थे जो उन्होंने जीती हुई थीं और जहाँ पर वो दूसरे नंबर पर रहे थे लेकिन कमलनाथ की ज़िद ने और उनकी “कौन अखिलेश वखिलेश” जैसी बेहूदा बयानबाजियों ने सपा प्रमुख को नाराज़ कर दिया और फिर मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में काफी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए और बाद में कमलनाथ की हार पर कटाक्ष भी किये थे. हालाँकि बाद में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव में समझौता हुआ और उसने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की. तब से अखिलेश के राहुल और प्रियंका से काफी अच्छे रिश्ते बताये जा रहे हैं लेकिन अब महाराष्ट्र और झारखण्ड विधानसभा के चुनाव आ गए हैं और अखिलेश ने महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन से अपना हिस्सा मांगकर MVA गठबंधन को चिंता में डाल दिया है क्योंकि इस गठबंधन की तीनों पार्टियों कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी में ही सीट एडजस्टमेंट पर खींचतान मची हुई है ऐसे में इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी को कहाँ समायोजित किया जाय, ये MVA के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनने वाली बात है.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि हमारा प्रयास है कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी से इंडिया गठबंधन मिलकर चुनाव लड़े। अखिलेश ने ये भी याद दिलाया कि पिछले चुनाव में उसने दो सीटें जीती थीं, न सिर्फ सीटें जीतीं थी बल्कि कई और सीटों पर काफी अच्छी टक्कर दी थी। अखिलेश का कहना है कि जीती हुई सीटों के अलावा MVA उन्हें कुछ और सीटों पर एडजस्ट करेगा और फिर इंडिया गठबंधन मिलकर महायुति सरकार को जो भाजपा ने MVA की दो सहयोगी पार्टियों को तोड़कर बनाई थी महाराष्ट्र की सत्ता से उखाड़ फेंकेगा। अखिलेश ने महाराष्ट्र में चुनाव लड़ने की बात पहली बार नहीं कही है वो कई बार इस बारे में बयान दे चुके हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं. ये बात MVA की पार्टियों को भी अच्छी तरह मालूम है, अब देखने वाली बात ये है कि क्या MVA समाजवादी पार्टी को एडजस्ट करेगा या फिर MVA की कोई सहयोगी पार्टी जिसमें कांग्रेस या एनसीपी अपने कोटे से समाजवादी को एडजस्ट करेगी। देखने वाली बात ये भी है कि अखिलेश यादव को कौन सी और कितनी सीटों में दिलचस्पी है. समाजवादी पार्टी का महाराष्ट्र में जो भी जनाधार है वो मुंबई में है, वो भी उन इलाकों में जो मुस्लिम बाहुल्य हैं और इन्हीं इलाकों में कांग्रेस की भी पैठ है इसलिए माना जा सकता है कि सपा को महाराष्ट्र में अगर एडजस्ट किया जाता है तो कांग्रेस को ही कुछ सीटें छोड़नी पड़ेंगी। कांग्रेस ऐसा कर भी सकती है, क्योंकि उसे भी यूपी में सपा के साथ की ज़रुरत है, अभी यूपी की 10 में से 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, सपा ने 6 सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर दी है. माना जा रहा है कि तीन सीटों में अखिलेश कांग्रेस पार्टी को दो सीटें दे सकते हैं, तो ऐसे में एक हाथ दे और दूसरे हाथ ले वाली बात बनती है. अखिलेश यादव की राहुल और प्रियंका के साथ उमर अब्दुल्लाह के शपथग्रहण समारोह की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई हैं जिन्हें देखकर लगता है कि महाराष्ट्र में अखिलेश को एडजस्ट किया जा सकता है भले ही अकेले कांग्रेस को क्यों न करना पड़े, फिर भी महाराष्ट्र पर अखिलेश के बयानों से महाविकास अघाड़ी परेशान तो होगा ही.

