नई दिल्ली। नाटो के सभी सहयोगियों ने फिनलैंड और स्वीडन, फिनलैंड को सदस्य बनाने के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद दोनों देशों का सदस्यता संबंधी अनुरोध मंजूरी के लिए गठबंधन देशों की राजधानियों को भेजा गया है। यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस को अलग-थलग करने के प्रयास के तहत कार्रवाई की गई। नाटो महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने बताया कि स्वीडन और फिनलैंड के लिए नाटो में शामिल होना ऐतिहासिक क्षण है।
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गठबंधन में समझौते के बाद भी तुर्की दोनों देशों को अंतिम रूप से शामिल होने में बाधा खड़ी करने की कोशिश में है। इसके पीछे तुर्की नेता रजब तैयब एर्दोगॉन ने चेतावनी दी है। जिसमें कहा है कि उन्होंने तुर्की संसद द्वारा समझौते के अनुमोदन से इनकार की बात कही है। फिनलैंड और स्वीडन के लिए बस एक यही बाधा है। नाटो में दोनों देशों को शामिल करने के लिए अंतिम रूप से सभी 30 देशों की औपचारिक सहमति जरूरी है।
प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर होने का यह मतलब नहीं है कि स्वीडन और फिनलैंड नाटो खेमे में जगह बनाने में कामयाब हो गए हैं। करीबी साझेदार के रूप में, वे पहले से ही गठबंधन की बैठकों में शामिल हो चुके हैं। दोनों देश अब आधिकारिक आमंत्रित रूप में, राजदूतों की बैठकों में भाग ले सकेंगे। लेकिन इन दोनों के पास मताधिकार नहीं होगा।

