नई दिल्ली। हर इंसान का सपना होता है कि उसका भी अपना एक घर हो। इसके लिए वह अपनी मेहनत की कमाई से पूंजी जोड़कर किसी बिल्डर के पास मकान खरीदने की हसरत से जाता है। बिल्डर को सामने रुपये दिखते हैं तो वह जल्द घर देने का वादा भी करता है। लेकिन अधिकांश मामलों में घर का सपना समय पर पूरा नहीं हो पाता।
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नतीजा बिल्डर के आफिस के चक्कर काटने और अपने घर की पजेशन के लिए सालों इंतजार करना होता है। लेेकिन अब केंद्र सरकार ने ऐसे बिल्डरों पर नकेल कस दी है। अगर रियल एस्टेट में मकान खरीदारों को समय से उनका घर नहीं मिल रहा है तो वे रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी रेरा में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी रेरा को इसी उद्देश्य से ही स्थापित किया है।
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मकान खरीदारों को घर समय पर नहीं मिलने पर सबसे पहले रेरा में शिकायत करनी होगी। रेरा में शिकायत के बाद प्राधिकरण या प्राइवेट बिल्डर पर खरीदार के पैसे वापस करने या फिर जल्द प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव बनाया जाएगा। अगर ऐसी स्थिति में भी पजेशन नहीं मिलता है तो मकान खरीदार को बिल्डर की तरफ से उसके द्वारा जमा किए गए रुपये को ब्याज सहित भुगतान करना होगा। बता दें कि इस समय सबसे अधिक यानी 1,13,860 मकान निर्माण का कार्य एनसीआर— दिल्ली में अटका हुआ है। जिस पर रेरा ने संज्ञान लिया है और संबंधित बिल्डर और प्राधिकरणों पर चाबुक चलाया है।

