महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले की जांच कर रही ठाणे पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को जांच के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं।
SIT के मुताबिक, आगरा की जिस प्रिंटिंग प्रेस में TET के प्रश्नपत्र छपे थे, वहां सुरक्षा व्यवस्था में कई बड़ी कमियां थीं। इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर कथित तौर पर प्रश्नपत्र प्रेस से बाहर निकाले गए।
सुरक्षा में मिली कई लापरवाहियां
जांच में पता चला कि दिल्ली मुख्यालय वाली महिम पत्रण लिमिटेड की आगरा यूनिट पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र शिक्षा विभाग की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र छाप रही है। इसी प्रेस में देश की कई अन्य गोपनीय परीक्षाओं के पेपर भी छपते रहे हैं।
SIT के अनुसार, प्रेस के कई संवेदनशील हिस्सों में CCTV कैमरे नहीं लगे थे। कर्मचारियों की आवाजाही की भी ठीक से जांच नहीं होती थी। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से गोपनीय दस्तावेज आसानी से बाहर ले जाए गए।
कर्मचारियों पर पेपर बाहर निकालने का आरोप
पुलिस का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी बाबूलाल कुशवाहा और नरेश महावर उर्फ निक्की ने प्रश्नपत्र प्रेस से बाहर निकाले।
इसके बाद ये प्रश्नपत्र कंपनी के पूर्व कर्मचारी सोनू कुमार दिवाकर तक पहुंचे। आरोप है कि सोनू ने उनकी फोटोकॉपी कराई और मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता के कहने पर दूसरे आरोपियों तक पहुंचा दिया, जो इन्हें बेचने के लिए महाराष्ट्र आए थे।
सोनू कुमार दिवाकर गिरफ्तार
भिवंडी अदालत में सरेंडर करने के बाद सोनू कुमार दिवाकर को SIT ने गिरफ्तार कर लिया।
मंगलवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उसे 2 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि सोनू ने साल 2018 में प्रिंटिंग प्रेस की नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन इसके बाद भी वह मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता के संपर्क में था। SIT का मानना है कि दोनों ने मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया।
फरार संदिग्ध पर भी जांच तेज
SIT के मुताबिक, पुणे का एक फरार संदिग्ध महाराष्ट्र सरकार के एक विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है।
जांच में सामने आया है कि वह लीक हुए प्रश्नपत्र हासिल करने में रुचि रखता था। पुलिस का कहना है कि उसके संपर्क में करीब 60 अभ्यर्थी थे, जो कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र खरीदना चाहते थे।
बिहार तक पहुंची जांच
मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता से लगातार पूछताछ की जा रही है।
इसी सिलसिले में भिवंडी पुलिस की एक टीम उसे लेकर बिहार के समस्तीपुर पहुंची है, जहां उसके अन्य साथियों और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
वहीं, महाराष्ट्र में भी पुलिस की अलग-अलग टीमें उन लोगों की तलाश कर रही हैं, जिन्होंने परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र खरीदने की योजना बनाई थी।
20-30 साल से मिल रहा था प्रिंटिंग का ठेका
SIT की जांच में यह भी पता चला है कि जिस प्रिंटिंग प्रेस में TET के प्रश्नपत्र छपे थे, उसे पिछले 20 से 30 वर्षों से सरकारी परीक्षाओं के पेपर छापने का ठेका मिलता रहा है।
जांच टीम का कहना है कि इतने वर्षों में भी वहां जरूरी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि इतने संवेदनशील काम के लिए इस प्रिंटिंग प्रेस को लगातार ठेका कैसे मिलता रहा।
अब तक इस मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मुख्य आरोपी, उसके सहयोगी और प्रिंटिंग प्रेस के वे कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन पर प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप है।

