RBI Retail Digital e-Rupee Project: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बड़ा ऐलान किया है। अब स्टेट बैंक के ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट करने में आसानी होगी। एसबीआई ने आज 4 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) इंटरऑपरेबिलिटी की सुविधा शुरू की है।
बता दें, एसबीआई दिसंबर 2022 में आरबीआई की रिटेल डिजिटल ई-रुपी प्रोजेक्ट में भाग लेने वाले पहले कुछ बैंकों में से एक था। एसबीआई से पहले ये सेवा यस बैंक (Yes Bank) और एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने सीबीडीसी ऐप पर मोबाइल डिजिटल रुपए नाम से यूपीआई इंटरऑपरेबिलिटी की शुरु की थी।
e-Rupee- जाने क्या है RBI की डिजिटल करेंसी?
यह फिएट मुद्रा (जैसे रुपया, डॉलर या यूरो) का एक डिजिटल संस्करण है। इसे केंद्रीय बैंक जारी करता है। इसी के साथ इसकी गारंटी देता है। यह फिएट मुद्रा के साथ वन टू वन विनिमय योग्य है। प्राइवेट मनी के मौजूदा रूपों जैसे ई-मनी (प्रीपेड वॉलेट में संग्रहीत मनी) या बैंक डिपॉजिट/जमा, जिसे कार्ड या मोबाइल पेमेंट सिस्टम का उपयोग कर इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसफर किया जा सकता है, से यह अलग होगा।
CBDC वर्चुअल/क्रिप्टो करेंसी से अलग?
CBDC निजी संस्थाओं द्वारा जारी क्रिप्टोकरेंसी से बिल्कुल अलग है। क्रिप्टोकरेंसी देनदारी नहीं है। जबकि इसके ठीक विपरीत CBDC केंद्रीय बैंक की देनदारी है। क्रिप्टोकरेंसी का वैल्यू इस उम्मीद पर निर्भर है कि दूसरे इसका कितना वैल्यू देगे। इसका कितना उपयोग करते हैं। सीमित उपयोग और कीमतों में भारी अस्थिरता की वजह से ऐसी प्राइवेट मुद्राएं अक्सर मनी के कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में विफल होती हैं। क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में उतार-चढ़ाव बहुत होता है।
क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग होती है। इसके लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का उपयोग होता है। इसे कोई सरकार या कोई विनियामक regulatory अथॉरिटी जारी नहीं करती। इसके उलट डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक जारी करता है। इस तरह की प्राइवेट मुद्राएं मनी की ऐतिहासिक अवधारणा में कहीं फिट नहीं बैठती। क्योंकि इनका कोई आंतरिक मूल्य नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि ये सोने की तरह होती हैं, जो एकदम सही नहीं है। क्योंकि गोल्ड की तरह न तो ये कमोडिटी हैं और न इनका कोई एस्थेटिक वैल्यू होती है।
मकसद प्राइवेट वर्चुअल करेंसी पर लगाम लगाना
डिजिटल करेंसी को लाने के पीछे भारत सहित विश्व के और भी केंद्रीय बैंकों का मकसद प्राइवेट वर्चुअल करेंसी पर लगाम लगाना है। हालांकि जानकार इस बात से सहमत नहीं कि CBDC का असर प्राइवेट वर्चुअल करेंसी पर होगा। इन मुद्राओं में निवेश करने वाले लोग इसे एसेट क्लास की तरह ट्रीट करते हैं। मुनाफा कमाने के मकसद से इसमें निवेश करते हैं। जबकि कुछ लोग अवैध गतिविधियों के लिए इन करेंसी का उपयोग करते हैं।

