राजस्थान के उदयपुर में हुए चिंतन शिविर में मंज़ूर हुए प्रस्तावों को कांग्रेस पार्टी ने शक्ल देना शुरू कर दिया है। प्रस्तावों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने आज तीन कमेटियों के गठन का एलान कर दिया है जिसमें एक पोलिटिकल अफेयर ग्रुप है, दूसरा टास्क फोर्स और तीसरा भारत जोड़ो यात्रा के लिए बनाया गया समन्वय ग्रुप। इन ग्रुपों में कांग्रेस के बाग़ी ग्रुप के सदस्य भी हैं और प्रशांत किशोर की टीम के पूर्व सदस्य सुनील कानूनगोलू को भी जगह मिली है जो चुनाव प्रबंधन का कामकाज संभालेंगे।
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राजनीतिक मामलों का जो ग्रुप घोषित किया गया उसमें सोनिया गाँधी के अलावा G-23 ग्रुप के गुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा के साथ मल्लिकार्जुन खड़गे, अंबिका सोनी, दिग्विजय सिंह, जितेंद्र सिंह और केसी वेणुगोपाल शामिल हैं। वहीँ भारत जोड़ो यात्रा के लिए बने ग्रुप में दिग्विजय सिंह, सचिन पायलट, शशि थरूर,रवनीत सिंह बिट्टू केजे जॉर्ज, जोथी मानी, प्रद्युत बोलदोलोई, जीतू पटवारी और सलीम अहमद के नाम हैं।
कांग्रेस के सबसे महत्पूर्ण ग्रुप जिसे टास्क फोर्स का नाम दिया गया है उसमें प्रियंका गाँधी का नाम शामिल है, उनके अलावा पी चिदंबरम, मुकुल वासनिक, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, अजय माकन, रणदीप सुरजेवाला और प्रशांत ग्रुप के पूर्व सहयोगी सुनील कानुगोलू के नाम शामिल हैं। कांग्रेस के मुताबिक टास्क फाॅर्स कांग्रेस का काम संगठन, संचार, मीडिया, जनता से संवाद, वित्त और चुनाव प्रबंधन को संभालना होगा। टास्क फाॅर्स के हर सदस्य के पास समर्पित टीमें रहेंगी. उदयपुर नव संकल्प घोषणाओं और 6 समूहों की रिपोर्ट के आधार पर ये टास्क फोर्स काम करेगी।
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चिंतन शिविर के बाद 2024 के चुनाव के लिए कांग्रेस का यह एक और बड़ा कदम है जो उसने आगे बढ़ाया है. इन तीनों ग्रूपों कांग्रेस नेता राहुल गाँधी का नाम शामिल नहीं है लेकिन कहा जा रहा है कि तीनों ग्रूपो में उनकी राय का महत्व होगा। वहीँ पार्टी महासचिव और यूपी की इंचार्ज प्रियंका गाँधी की पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर ज़िम्मेदारी बढ़ाई जा रही है. कहा तो यह भी जा रहा है कि राहुल गाँधी अगर पार्टी अध्यक्ष न बनने की अपनी ज़िद पर अड़े रहे तो प्रियंका गाँधी सबसे पहला विकल्प होंगी। इन घोषित ग्रूपों में एक ख़ास बात और है वो यह कि बागी ग्रुप के दो सदस्यों को जो शामिल किया गया है उन्हें सोनिया गाँधी हैंडल करेंगी। बता दें कि चिंतन शिविर में यह बात सामने आयी थी कि वरिष्ठ नेताओं की भूमिका एक सलाहकार के रूप में होगी।

