दूसरों की जिंदगी को रंगों से सराबोर करते हैं इन विधवा महिलाओं के हाथों से बने फूलों के गुलाल

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दूसरों की जिंदगी को रंगों से सराबोर करते हैं इन विधवा महिलाओं के हाथों से बने फूलों के गुलाल

यहां पर होली के लिए विधवा महिलाएं बनाती हैं फूलों से गुलाल,महीनों पहले होती है तैयारी

मथुरा। मथुरा की होली का पूरे विश्व में ही अपना अलग ही महत्व है। बसंत के बाद यहां पर होली का महोत्सव (festival of holi) शुरू हो जाता है। वृंदावन के आश्रय सदन में रहने वाली विधवा माताएं भगवान बांके बिहारी के श्री चरणों में अर्पण किए गए फूलों से गुलाल तैयार करती हैं। बसंत पंचमी के दिन से ही मंदिरों से आश्रय सदन में फूल चुनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह माता है 3 दिन की कड़ी मेहनत के बाद गुलाल तयार करती हैं।

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अपनों ने जिन माताओं की जिंदगी को बदरंग कर दिया था वह माताएं अब दूसरों की जिंदगी में रंग भरने का कार्य कर रही हैं। वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन (Women’s Shelter House) में दर्जनों विधवा माताएं ठाकुर जी के चरणों में अर्पण किए गए प्राकृतिक फूलों से गुलाल बनाने का कार्य कर रही हैं। ठाकुरजी के चरणों में अर्पित किए गए फूलों से बना हो तो लोगों की आस्था इन रंग या गुलाल में और भी प्रगाढ़ हो जाती है। ब्रज गंधा प्रसाद समिति के सेल्स एंड डेवलपमेंट के असिस्टेंट मैंनेजर सुधांशू मिश्रा ने बताया कि अपनी सुविधा के अनुसार यहां रह रही माताएं समय निकाल कर फूलों से हर्बल गुलाल (Herbal Gulal) तैयार करने में जुटी हैं। करीब 60 विधवा माताएं फूलों से गुलाल बनाने में जुटी हुई हैं। भगवान बांके बिहारी मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से गुलाल बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि करीब 30 से 40 किलो प्रतिदिन फूल मंगाए जाते हैं। इन फूलों में गुलाब गेंदा के साथ-साथ चमेली और मोगरा के फूल भी शामिल हैं। विधवा माताएं सभी फूलों को अलग अलग करती हैं और इन्हें सुख आती हैं उसके बाद मशीन के जरिए पाऊडर तैयार किया जाता है।


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3 दिन की प्रक्रिया के बाद गुलाल तैयार होकर पैकेजिंग के लिए जाता है। उन्होंने कहा कि रुपये 50 का 50 ग्राम और 100 रुपये का 100 ग्राम गुलाल हम लोग बेचते हैं। पिछली बार होली पर करीब डेढ़ कुंटल गुलाल हम लोग विभिन्न माध्यमों से लोगों को बेच चुके हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी अनुरागश्याम रस्तोगी ने बताया कि मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से गुलाल और अगरबत्ती बनाने का काम पिछले वर्ष शुरू किया गया था। पिछले साल होली पर करीब 1 क्विंटल गुलाल बनाकर करीब 1 लाख रुपए का बिक्री किया गया था। प्राकृतिक गुलाल की बढ़ती डिमांड को देखते हुए इसबार करीब 2-3 क्विंटल गुलाल तैयार किया जा रहा है।

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