मेरठ। UP Chunav 2022: RLD चीफ जयंत चौधरी – भाजपा नेताओं द्वारा जाटों को मनाने की सभी कोशिशें पहले चरण के चुनाव से पहले बेकार हो गई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली से लेकर लखनऊ और फिर पश्चिमी उप्र के जिलों में जाट नेताओं के साथ गुप्त बैठकें कर जाट मतदाताओं को मनाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन जाट समुदाय टस से मस नही हुआ। बताया जा रहा है कि जाटों ने इस बार बार पहले चरण के चुनाव में भाजपा के खिलाफ वोट किया है। अगर ऐसा हुआ तो पश्चिमी की 58 सीटों के चुनाव परिणाम काफी चौकाने वाले साबित होंगे।
Read also: उत्तर प्रदेश चुनाव: दिलचस्प हुई पश्चिमी उप्र की चुनावी लड़ाई,हर पक्ष हालात भुनाने की कोशिश में
यूपी चुनाव से पहले से ही जाट समुदाय भाजपा से नाराज चल रहा था। कृषि बिल हो या फिर लखीमपुर में किसानों को कुचलकर मारने का मामले ने जाटों की नाराजगी को और भड़का दिया। पश्चिमी उप्र की जिस बेल्ट में पहले चरण की 58 सीटों पर मतदान हुआ इनमें से अधिकांश जाट बाहुल्य मानी जाती हैं। सर्वाधिक नाराज इन्हीं पश्चिमी उप्र के जाट मतदाता चल रहे थे। भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में इन्हीं जाटों के बूते पश्चिमी में अपना झंडा बुलंद किया था। लेकिन इस बार हालात चुनाव से पहले काफी बदल गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गर्मी निकाल देने वाले बयान का भी गलत मैसेज जाट समुदाय में गया। जाट समुदाय में मैसेज गया गर्मी निकाल दूंगा वाला बयान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जयंत के लिए बोला था। इस पर भी जयंत चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा था कि हम तो जाट के लड़के है खून में तो हमारे गर्मी है ही। वहीं दूसरी ओर जयंत पर हाथरस कांड के दौरान बरसी लाठी को भी जाटों ने याद रखा। अजित सिंह की छिनी कोठी केा भी जाटों ने अपनी बिरादरी की बेइज्जती माना। इन सब को जाट समुदाय ने अपने स्वाभिमान से जोड़ लिया। जिसका परिणाम पहले चरण के मतदान के बाद सबसे सामने हैं। मेरठ की सबसे चर्चित सीट सरधना और शामली की चरथावल सीट को सबसे हाट माना जा रहा था।
Read also: योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से किया नामांकन, अमित शाह भी रहे मौजूद
इन दोनों ही सीटों पर भाजपा के दिग्गज संगीत सोम और गन्ना मंत्री सुरेश राणा चुनाव लड़े हैं। मतदान के बाद दोनों दिग्गजों की हालत खराब है। भाजपा की रणनीति थी कि पहले चरण के चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह को आगे करों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पीछा करों। लेकिन यह सब इतना तीखा हो गया कि अब भाजपा को कुछ सूझ नहीं रहा है। वहीं राकेश टिकैत के डायलाग भी सबकी जुबान पर चढ़े और इसने भी आग में घी का काम किया।

