मेरठ। जिले का मेडिकल कालेज। जिसकी व्यवस्था सुधारने के प्रयास में कई प्राचार्य या तो रिटायर हो गए या उनका स्थानांतरण हो गया। मेडिकल कालेज की व्यवस्था सुधारने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आना पड़ा। कई नोडल अधिकारी बदले गए। लेकिन उसके बाद भी यहां व्यवस्थाएं नहीं सुधरी। यहां हम बात उस दौर की कर रहे हैं। जब पूरी दुनियां कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर से जूझ रही थी। उस दौरान यहां की अव्यवस्था का आलम ये था कि कई बार लाशों की अदला बदली हो गई।

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मेडिकल कालेज की लापरवाही के चलते कई लाशों को अपनों के हाथ से मुखाग्नि भी नहीं नसीब हो पाई। वहीं कई बार यहां पर बच्चे बदल दिए जाते हैं। अब बात अब ताजे मामले की करें तो यहां पर गंदगी और जलभराव से बुरा हाल है। मेडिकल कालेज में जगह- जगह जल भराव है। महामारी में जितनी तकलीफ कोरोना दे रहा था उससे अधिक तकलीफ मेडिकल कालेज की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दे रही थी।

चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते कई संक्रमितों ने तो वहां की व्यवस्था देखकर ही दम तोड़ दिया था। इस समय हालात ये हैं कि मेडिकल कालेज में अगर प्यास बुझाने के लिए पानी पीना है तो उसके लिए भी पानी के बीच से चलकर जाना होगा। तभी आपके गले की प्यास बुझ सकेगी। मेरठ मेडिकल कालेज में सिर्फ मेरठ ही नहीं आसपास के करीब 15 जिलों के लोग इलाज के लिए आते हैं।
इनमें से अधिकांश ऐसे होते हैं जेा कि एक दिन में अपने घर जाने की स्थिति में नहीं होते। इसलिए वो यहीं मेडिकल कालेज परिसर में ही रूककर दूसरे दिन इलाज करवाने के बाद जाते है। लेकिन जिस तरह से यहां पर गंदगी का आलम है। उससे तो यहीं कहा जा सकता है कि मेरठ मेडिकल कालेज की व्यवस्था सुधरना किसी के बूते की बस की नहीं।
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