यूपी में 54 प्रतिशत महिलाएं नहीं करती फ़ोन का प्रयोग

उत्तर प्रदेशयूपी में 54 प्रतिशत महिलाएं नहीं करती फ़ोन का प्रयोग

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यूपी में 54 प्रतिशत महिलाएं नहीं करती फ़ोन का प्रयोग

  • 25 प्रतिशत के पास नहीं बैंक खाते
  • स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में हुआ सबसे बड़ा खुलासा

उत्तरप्रदेश में आज भी आधी आबादी का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन से वंचित है। या वह इनका इस्तेमाल ही नहीं करती हैं। यही नहीं ऐसी महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है। जिनके पास खुद के बैंक खाते तक नहीं है। यह हैरान कर देने वाला खुलासा हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा करवाए गए नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट में हुआ है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 54 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जो ख़ुद फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करती हैं।

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शहरों की स्थिति में ख़राब

डिजिटल युग में जहां सारी सुविधाएं ऑनलाइन दी जा रही है। महिलाओं के हित और सशक्तिकरण में तमाम योजनाएं चल रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं के पास खुद का फोन ना होना महिलाओं के पिछड़ेपन की कहानी साफ़ बताता है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति काफी सोचनीय है। जबकि शहरी क्षेत्रों में भी ये स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में मात्र 59.9 प्रतिशत महिलाए ही ऐसी हैं जिनके पास ख़ुद के फ़ोन हैं। जबकि ग्रामीण इलाकों में भी 42.4 प्रतिशत महिलाएं ही अपने पास फ़ोन रखती हैं। हालांकि 2015-16 में हुए नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे-4 में ये आंकड़ा 37.1 प्रतिशत ही था। बीते 5 सालों में इस आंकड़े में मात्र 9.4 प्रतिशत की ही बढ़ोत्तरी हुई है।

24.6 प्रतिशत नहीं प्रयोग करती बैंक खाते

यूपी में जहां जन-जन के बैंक खाते खोलने की तमाम योजनाएं चल रही हैं वहीं प्रदेश की 24.6 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जो खुद बैंक खातों के इस्तेमाल नहीं करती हैं । शहरी इलाकों में ये आंकड़ा 79.8 प्रतिशत है जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़ा 74.1 प्रतिशत है।

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87 प्रतिशत महिलाओं की मुख्य फ़ैसलों में बड़ी भागीदारी

प्रदेश में आधी आबादी का एक बड़ा हिस्सा घर के मुख्य फैसलों में अपनी भागीदारी रखता है सर्वे के अनुसार प्रदेश भर की 87 % महिलाएं घर-परिवार के तीन मुख्य फैसलों में अपनी राय देती हैं। इनमें घर के सामान से जुड़ी खरीददारी, रिश्तेदारों के या अपने परिवार से मिलने सम्बन्धी व अपने स्वास्थ्य से संबंधित फैसले शामिल हैं। 2015-16 में ये आंकड़ा 81.7 प्रतिशत था।

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