हर साल आज के दिन यानी 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day 2022) मनाया जाता है। गौरैया आम तौर हर घर के आंगन में चहकती है। लेकिन बीते कई सालों में गौरैया की संख्या में तेजी से कम हो गयी है। ये प्रकृति के लिए चिंताजनक है। इसी कारण से 2010 से गौरैया संरक्षण को लेकर विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
गौरैया, चिड़ियां है जो लारवा और कीट का सेवन करती है, जिससे प्रकृति का संतुलन कीड़े-मकोड़ों के साथ बना रहता है। ये गौरैया फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाती है। जिससे किसानों की फसल बचती है।
Read also: पृथ्वी का संरक्षण करें, आद्र्रभूमि को संजोए, मानव और प्रकृति का सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखें
गौरैया की संख्या में भारी मात्रा में कमी से अब फसल के कीड़ों को मारने के लिए किसान कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करते हैं, जिससे इंसानों को मिलने वाले अनाज साब्जियां सभी कीटनाशक दवाओं की वजह से अनेक बीमारियों पैदा हो रही है। इससे प्रकृति के द्वारा बनाए गए चक्र में से किसी भी एक चक्र के नष्ट होने पर इसका संतुलन बिगड़ता है और उससे होने वाले नुकसान का सीधा असर इंसानी जीवन पर पड़ता है।
गौरैया की संख्या में कमी को लेकर अब लोग सजग हो रहे हैं और घरों में इनको पाल रहे है। ये पहले हर घर की छतों पर घोसला बनाती थी। लेकिन अब इसका घोसला देखने को नहीं मिलता।
Read also: इंटरनेशनल आर्ट मशीन ने प्रीति जिंटा, दिबाकर बनर्जी के साथ किया करार
गौरैया की घटती संख्या के लिए इस पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट के लिए इंसान जिम्मेदार है, क्योंकि गौरैया की घटती संख्या के जो कारण आए हैं वो उनके रहने की समस्या के साथ मोबाइल रेडिएशन हैं। रहने का स्थान ना होने से गौरैया तेज ध्वनि की चपेट में आने से विलुप्त हुई है तो वहीं मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) के चलते मादा गौरैया की प्रजनन क्षमता खत्म होना बताया जा रहा है।

