मैंने डरना तो कब का छोड़ दिया है- पिया शर्मा

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मैंने डरना तो कब का छोड़ दिया है- पिया शर्मा

Zeba Hasan

वह अपनी आवाज और अंदाज से हजारों की भीड़ पर छा जाती हैं। सिलेब्रिटी शो हो या फिर कोई फेस्टिवल वह उसे अपनी ऐंकरिंग से और भी दिलचस्प बना देती है। यही नहीं जब भी उनका मन करता है वह बैग पैक करके देश या विदेश में घूमने निकल पड़ती है। उनका यह अंदाज उन्हें कई लड़कियों से जुदा बनाता है। यह हैं फेमस ऐंकर पिया शर्मा ( Anchor Piya Sharma) । दिल्ली की पिया ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। पिया ने इस फील्ड को क्यों चुना, उन्हें क्या परेशानियां आई इस बारे में हमने उनसे की यह खास बात।

मैंने डरना तो कब का छोड़ दिया है- पिया शर्मा

ऐंकरिंग खुद चल कर मेरे पास आई थी

मैं एक ईवेंट कम्पनी में काम करती थी। कम्पनी के गई ईवेंट होते थे जिनके लिए ऐंकर आती थीं। कभी कोई ईवेंट को खराब कर देती तो कभी कोई टाइम पर पहुंचती ही नहीं थी। मैंने कई बार बैक स्टेज से ऐंकर्स की बैकिंग की। फिर एक बार हमारा एक इनहाउस ईवेंट हुआ। उस पूरे ईवेंट को मैंने ही ऐंकर किया। मेरे काम और अंदाज को सबने खूग तारीफ की और कुछ वीडियो क्लिप भी मिले। मुझे भी लगा कि मैं यह कर सकती हूं। फिर मैंने अपनी एक नई प्रोफाइल बनाई और कुछ जगह भेजी। और मेरे पास काम आने लगे। इस बीच मैंने दूसरी जॉब भी की लेकिन ऐंकरिंग में मुझे सब जानने लगे थे। मेरे पास काफी काम आने लगा। फिर जॉब छोड़ कर मैंने 2014 में फुल टाइम ऐंकरिंग शुरू कर दी जो आज भी जारी है।

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मैंने कभी किसी को हावी नहीं होने दिया

हजारों की भीड़ के बीच खड़े होकर लोगों से मुखतिब होना, ज्यादातर रात को घर लौटना एक लड़की होने के नाते लोगों को अखरता होगा लेकिन मैं अपने आप में मजबूत हूं। हर फील्ड की तरह यहां पर भी लड़कियों के सामने ऑकवर्ड सिचुएशन आती हैं लेकिन मेरा मानना है कि लड़की अगर मजबूत हो तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैंने कभी किसी को खुद पर हावी होने नहीं दिया। अगर लड़की ईजी एप्रोच में नहीं रहेगी तो कोई उसे हिला नहीं सकता। मेरा मानना है कि ऐसी कोई सिचुएशन नहीं जिसका मुकबला आज की लड़कियां कर नहीं सकतीं। सिचुएशन कोई भी घबराना नहीं है बल्कि उससे चाहिए।

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दबोगे तो दुनिया दबाएगी

मुझे लगता है कई बार लड़कियों का विजन अपन बारे में क्लीयर नहीं होता। कभी पिता, कभी पति तो कभी बॉयफ्रेंड की वजह से वह दो नावों पर सवार रहती हैं। मेरा मानना है कि कोई आपको मोटीवेट नहीं कर सकता आप अपनी मोटीवेटर खुद बनो। अपने करियर को लेकर अपना विजन क्लीयर रखना चाहिए। काम के प्रति पूरी ईमानदारी। जब फैमिली टाइम हो तो 100 प्रतिशत फैमिली को देना चहिए और जब काम का टाइम हो तो बस काम पर ही ध्यान देना चाहिए। वह इंसान ही क्या जो आपको बदलना चाहे। प्यार तो वहां होता है जहां आपका साथी आपको आपके ख्वाबों के साथ स्वीकार करे। इसलिए आप जो करो बस अपने दिल से करो जितना आप दबोगे दुनिया उतना ही दबाएगी।

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हमारा बॉडी स्ट्रक्चर ही तो अलग है

मेरा मानना है कि लड़कियां किसी मायने में कमजोर नहीं है। मैं अपने देश में ही नहीं बाहर के मुल्क भी जाती हूं काम के लिए। काम के अलावा घूमना मेरा शौक है तो जब भी मन करता है बैग उठाकर ब्रेक पर चली जाती हूं। मैं देश विदेश अकेले ट्रैवल करती हूं। लेकिन मुझे डर नहीं लगता। डरना तो मैंने कब का छोड़ दिया था। मैं और किस से डरूँ ? एक लड़की और लड़के में महज बॉडी स्ट्रक्चर का ही तो फर्क है। इस फर्क से क्या हम इतना अलग हो जाते हैं कि अपनी जिंदगी का नजरिया बदल दें? नहीं बिलकुल नहीं। लड़का हो या लड़की हैं तो ह्यूमनबींग और हर इंसान को अपनी शर्तों पर जीने का पूरा अधिकार है।

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