लखनऊ: UP Polls 2022| उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के छठवें चरण (Sixth phase) में कुशीनगर की सातों विधानसभा सीटों पर तीन मार्च को मतदान संपन्न हो चुका है। यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने वर्ष 2017 के चुनाव में पांच सीटें और सहयोगी सुभासपा ने एक सीट जीती थी। जबकि, विपक्षी दलों में सिर्फ कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी अजय कुमार लल्लू ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। इस बार के चुनाव में भाजपा जिले में पांच सीटों पर एवं दो सीटों पर उसकी सहयोगी निषाद पार्टी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। कई दिग्गज नेताओं के सियासी वर्चस्व वाले इस जिले की सीटों का चुनावी समीकरण भी समझ लीजिए, जिसके नतीजे 10 मार्च को सामने आएंगे।
खड्डा विधानसभा सीट-329
निवर्तमान विधायक- जटा शंकर त्रिपाठी
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन- विवेकानंद पांडेय
सुभासपा- अशोक चौहान
बसपा- डॉ. निसार अहमद सिद्दीकी
कांग्रेस- धनंजय सिंह पहलवान
आप- राजकुमारी
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नौरंगिया के नाम से जानी जाने वाली खड्डा विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। सन् 1974 से लेकर अब तक इस सीट पर चार बार बीजेपी, तीन बार कांग्रेस और दो बार सपा ने जीत हासिल की। जबकि एक-एक बार खड्डा विधानसभा सीट जनता पार्टी, जनसंघ और निर्दलीय के पास भी रह चुकी है। वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस के विजय कुमार दुबे ने सपा के एनपी कुशवाहा मात देकर यह सीट जीती थी। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी के जटाशंकर त्रिपाठी ने बसपा के विजय प्रताप कुशवाहा को हराकर इसे अपने कब्जे में लिया। हालांकि, इस बार भाजपा ने यह सीट सहयोगी दल निषाद पार्टी को सौंप दी और डॉ. संजय निषाद ने यहां से विवेकानंद पांडेय को टिकट दिया है। सपा के सहयोगी दल सुभासपा ने अशोक चौहान को मैदान में उतारा है। बसपा ने डॉ. निसार अहमद को टिकट देकर इस सीट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। हालांकि, असल नतीजे तो 10 मार्च को ही सामने आएंगे।
कुल मतदाता- 3.11 लाख से अधिक
जातिगत आंकड़े (अनुमानित)
दलित- 67 हजार
मुस्लिम- 65 हजार
कुशवाहा- 57 हजार
यादव- 53 हजार
ब्राह्मण- 48 हजार
कुर्मी- करीब 38 हजार
पडरैना विधानसभा सीट-330
निवर्तमान विधायक- स्वामी प्रसाद मौर्य
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- मनीष कुमार जायसवाल उर्फ मंटू
सपा- पूर्व ब्लॉक प्रमुख विक्रमा यादव
बसपा- पवन कुमार उपाध्याय
कांग्रेस- युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहम्मद जहीरुद्दीन
आप- रवि शंकर
इस सीट पर भाजपा ने पहली बार सन् 1991 में जीत दर्ज की थी। सन् 1993 के उप चुनाव में बालेश्वर यादव फिर विधायक चुने गए। इसके बाद सन् 1998, 2002 और 2007 में लगातार कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह ने जीत हासिल की। वहीं, वर्ष 2012 के चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह सीट बसपा के खाते में डाली। उसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा में शामिल हुए और विधायक बने। हालांकि, इस बार वह भाजपा से बागी होकर सपा में शामिल हो गए हैं, जिसके बाद बीजेपी ने यहां से मनीष कुमार को उतारा है। इस सीट के मतदाताओं का रुझान ज्यादातर सत्ता विरोधी ही रहा है तो ऐसे में भाजपा के लिए यह सीट जीतनी चुनौतीभरा है, जिसका नतीजा 10 मार्च को सामने आएगा।
कुल मतदाता- 3.48 लाख से अधिक
जातिगत आंकड़े (अनुमानित)
मुस्लिम- 84 हजार
अनुसूचित- करीब 76 हजार
ब्राह्मण- 52 हजार
यादव- 48 हजार
सैंथवार- 46 हजार
कुशवाहा- करीब 44 हजार
तमकुहीराज विधानसभा सीट- 331
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
कांग्रेस- निवर्तमान विधायक अजय कुमार ‘लल्लू’
भाजपा- डॉ. असीम कुमार राय
सपा- डॉ. उदय नारायण प्रताप
बसपा- संजय गुप्ता
सेवरही विधानसभा सीट के नाम से जानी जाने वाली यह सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इस सीट पर पहला चुनाव वर्ष 2012 में हुआ, जिसमें कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी अजय कुमार ‘लल्लू’ ने जीत हासिल की। अब प्रदेश की वीआईपी (VIP) सीटों में से एक हुई तमकुहीराज से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ वर्ष 2017 में भी जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। लल्लू अपने संघर्षों के कारण से हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। ऐसे में इस बार अजय कुमार ‘लल्लू’ जहां जीत की हैट्रिक लगाना चाहेंगे तो वहीं, भाजपा के सामने उन्हें रोकने की चुनौती होगी।
कुल मतदाता- 3,78,000
जातिगत आंकड़े (अनुमानित)
मुस्लिम- 55 हजार
यादव- 48 हजार
ब्राह्मण- 41 हजार
भूमिहार- 36 हजार
कुर्मी- 29 हजार
निषाद- करीब 27 हजार
फाजिलनगर विधानसभा सीट-332
निवर्तमान विधायक- गंगा सिंह कुशवाहा
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- गंगा सिंह कुशवाहा की जगह बेटे सुरेंद्र कुशवाहा
सपा- भाजपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य
बसपा- इलियास अंसारी
कांग्रेस- सुशील मनोज सिंह
आप- हरिश्चंद्र यादव
फाजिलनगर सीट पर वर्ष 2007 के चुनाव में सपा के टिकट पर विश्वनाथ विधायक चुने गए थे। वहीं, वर्ष 2012 और 2017 में जनता ने भाजपा प्रत्याशी गंगा सिंह कुशवाहा पर भरोसा दिखाते हुए उन्हें विधानसभा भेजा। हालांकि, भाजपा ने इस बार गंगा सिंह के बेटे सुरेंद्र कुशवाहा को चुनावी मैदान में उतारा है। ऐसे में पडरौना सीट छोड़ फाजिलनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे बीजेपगी बागी स्वामी प्रसाद मौर्य की राह आसान नहीं होगी, क्योंकि सुरेंद्र कुशवाहा उन्हें कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। वहीं, इस सीट पर बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले के तहत अखिलेश यादव के खास माने जाने और खुद को सपा का सेवक बताने वाले मोहम्मद इलियास को टिकट दिया है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य और मोहम्मद इलियास अब आमने-सामने हैं, क्योंकि यहां मुस्लिम वोटर भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में इस बार के चुनाव में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है।
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कुशीनगर विधानसभा सीट- 333
निवर्तमान विधायक- रजनीकांत मणि त्रिपाठी
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- रजनीकांत मणि त्रिाठी के जगह पीएन पाठक
सपा- राजेंद्र प्रताप राव उर्फ बंटी राव
बसपा- मुकेश्वर उर्फ पप्पू मधेशिया
कांग्रेस- श्यामरती देवी
आप- अतुल कुमार पाण्डेय
एआईएमआईएम- शफी अहमद
वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट से वर्तमान में भाजपा के रजनीकांत मणि त्रिपाठी विधायक हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा (BSP) के राजेश प्रताप राव ‘बंटी भैया’ को 48,103 मतों से हराया था। इससे पूर्व वर्ष 2012 के चुनाव में इस सीट से सपा के ब्रह्मशंकर त्रिपाठी ने जीत हासिल की थी। करीब साढ़े 3 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर ब्राह्मण वोर्टस (Brahman voters) का दबदबा देखा जाता है। जबकि, अनुसूचित और मुस्लिम वर्ग के मतदाता भी निर्णायक की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यहां भाजपा के पीएन पाठक और सपा के राजेश प्रताप राव के बीच मुकाबला होता नजर आ रहा है। अब 10 मार्च को देखना दिलचस्प होगा कि कुशीनगर विधानसभा सीट पर फिर से कमल खिलता है या जनता साइकिल पर सवार होती है।
कुल मतदाता- 3,54,951 से अधिक
हाटा विधानसभा सीट- 334
निवर्तमान विधायक- पवन कुमार केडिया
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- पवन कुमार केडिया की जगह मोहन वर्मा
सपा- रणविजय सिंह
बसपा- शिवांग सिंह सैंथवार
कांग्रेस- अमरेंद्र मल्ल
आप- मोनिका तिवारी
इस सीट पर पिछले तीन विधानसभा चुनावों में दो बार भाजपा जीती और एक बार सपा (SP) ने जीत हासिल की है। वर्ष 2007 में यहां से भाजपा के रमापति उर्फ रमाकांत ने विजय पताका फराई थी। वर्ष 2012 के चुनाव में सपा के टिकट पर राधेश्याम सिंह विधायक बने थे। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा के पवन कुमार केडिया ने सपा के राधेश्याम सिंह को 53,076 मतों के अंतर से हराया था। हालांकि, बसपा इस सीट पर अभी तक अपना खाता नहीं खोल पाई है। भाजपा और सपा ने अपने-अपने प्रत्याशी भी इस बार बदल दिए हैं, जिससे यहां मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है।
कुल मतदाता- 3.56 लाख से अधिक
जातिगत आंकडे (अनुमानित)
सैंथवार- करीब 96 हजार
दलित- 65 हजार
ब्राह्मण- 63 हजार
मुस्लिम- 59 हजार
रामकोला (सुरक्षित) विधानसभा सीट-335
निवर्तमान विधायक- रामानंद बौद्ध
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- विनय गोण्ड
सपा-सुभासपा गठबंधन- पूरनमासी देहाती
बसपा- विजयंत कुमार
कांग्रेस- शंभू चौधरी
आप- शंभु कुमार एडवोकेट
परिसीमन से पहले वर्ष 2007 के चुनाव में इस सीट से भाजपा के जसवंत सिंह उर्फ अतुल विजयी हुए थे। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां से सपा की पूरनमासी देहाती जीती थीं। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 में सुभासपा के रामानंद बौद्ध को जीत मिली थी। ऐसे में भाजपा से बागी हुए सुभासपा को यहां अपनी बादशाहत बरकरार रखना बड़ी चुनौती है। फिलहाल, इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा, जिसका नतीजा 10 मार्च को सामने आएगा।
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कुल मतदाता- करीब साढ़े तीन लाख
जातिगत आंकड़े (अनुमानित)
दलित- करीब एक लाख
कुर्मी- 46 हजार
मुस्लिम- करीब 40 हजार
चौहान यानी नोनिया- 15 हजार
राजभर- 13 हजार
ब्राह्मण- 10 हजार
क्षत्रिय- करीब 09 हजार
यादव- आठ हजार।

