चीन के आगे सैलानियों के लिए हाथ क्यों जोड़ रहा है मालदीव

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प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी करने के बाद मालदीव और भारत के संबंधों में खटास आ गयी, ये खटास सरकार से ज़्यादा भारतीय टूरिज्म कंपनियों में आयी है. उन्हें प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं हुई और यही वजह कि सोशल मीडिया पर मालदीव के बॉयकॉट का ट्रेंड शुरू हो गया. भारतीय टूरिज़म कंपनी EaseMyTrip ने मालदीव की अपनी सारी बुकिंग कैंसिल कर दीं और उसका अनुसरण और भी कई भारतीय कंपनियों ने किया। हालत ये हो गयी मालदीव सरकार को चीन के आगे हाथ जोड़कर भीख मांगनी पड़ी कि वो इस नुक्सान की भरपाई के लिए चीन से ज़्यादा संख्या में टूरिस्ट मालदीव भेजे।

दरअसल चीन के आगे टूरिस्टों के लिए हाथ फैलाने की एक वजह भी है. एक तो चीन की बादशाहत को भारत चैलेन्ज करता है और इसीलिए चीन हर उस देश की मदद करता है जिसके भारत से सम्बन्ध खराब हैं. दूसरे भारत के बाद मालदीव जाने वाले टूरिस्टों की संख्या में चीन दुसरे नंबर पर है हालाँकि चार साल पहले चीन पहले नंबर पर था लेकिन पिछले चार सालों में भारतीय सैलानियों के लिए मालदीव पहली पसंद बन गया और देखते देखते चीन की तुलना में भारतीय सैलानियों की संख्या चीन से आगे निकल गयी. अगर 2023 की बात करें तो चीन के 1,87,118 टूरिस्टों की तुलना में भारतीय सैलानियों की संख्या 2,09,198 रही.

लेकिन नए हालात में निश्चित तौर पर भारत से मालदीव जाने वाले टूरिस्टों की संख्या में बड़ी गिरावट आएगी और इसे लेकर मालदीव का टूरिज्म सेक्टर बहुत परेशान है, उसने EaseMyTrip के CEO को चिठ्ठी लिखकर बातचीत से मामला सुलझाने का अनुरोध भी किया है. हालाँकि मालदीव की माइज़्ज़ु सरकार ने उन तीनों नेताओं को पद से बर्खास्त कर दिया है जिनमें उनकी एक महिला मंत्री भी शामिल थी लेकिन भारतीय टूरिज्म कंपनियों का गुस्सा कम नहीं हो रहा है. माइज़्ज़ु इन दिनों चीन के दौर पर हैं और वो वहां लोगों से अपील कर रहे हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में मालदीव आएं.

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