लखनऊ। योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि कुछ प्रशासनिक अधिकारी समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ते हैं तो कुछ भ्रष्टाचार की चपेट में आकर असमय इस व्यवस्था से दरकिनार कर दिए जाते हैं। जो लोग शुरू से इस पर ध्यान नहीं देते, वह आगे चल कर खुद अपने लिए समस्या बन जाते हैं। हम समाज के लिए समस्या नहीं बल्कि उसकी समस्याएं सुलझाने का माध्यम बनें। कहा है कि प्रशासनिक व्यवस्था में बैठे अधिकारी अपने को नए प्रोटोकॉल में ढालने और टापू की तरह खुद को एकांकी जीवन में डालने से बचें क्योंकि इससे उनका समाज, देश व काल से संबंध विच्छेद हो जाता है। जब हम टापू बन जाते हैं तो हमारे इर्द-गिर्द घूमने वाली मक्खियों से जो भी दुव्र्यवस्था फैलाई जाती है, वह तमाम बीमारियों को जन्म देती है। हमें पहले दिन से ही इस बीमारी से बचना होगा।
आज जो भी अधिकारी आज गलत काम करता है, कुछ महीनों या वर्षों के बाद उसका भंडाफोड़ हो ही जाता है। इसके बाद प्रमोशन से डिमोशन और फिर बर्खास्तगी होती है। सरकार किसी के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करती लेकिन दूर रहकर तटस्थ भाव से सबकी समीक्षा करती है।
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यह विचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के मिशन रोजगार के तहत लोक भवन में आयोजित उप. लोक सेवा आयोग की सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2019 में चयनित उपजिलाधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए प्रकट किये। इस कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी के पद पर चयनित 49 अभ्यर्थी मौजूद थे। जिनमें से दस को मुख्यमंत्री ने खुद नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों को सबसे बड़े राज्य एवं सबसे बड़ी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए बधाई दी।
सीएम योगी इस मौके बोले, सेलेक्टेड ऑफिसर के अंदर जोश भरा और उनको ईमानदारी के साथ काम करने की सीख भी प्रदान की। उन्होंने कहा कि प्रादेशिक सेवाएं भारतीय प्रशासनिक सेवा की रीढ़ होती हैं। नवचयनित अधिकारी, अपने उत्तरदायित्व के निर्वहन में निष्पक्षता व पारदर्शीता अवश्य अपनाएं। जिससे आपकी प्रशासनिक सेवाओं का लाभ प्रदेश के हर नागरिक को प्राप्त हो सके। हमारी सरकार के कार्यकाल में नियुक्तियों में शुचिता और पूरी पारदर्शीता बरती जा रही है।
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इस मौके पर सीएम ने इस यह भी कहा कि सूबे में सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया साल 2017 के पहले कैसे कलंकित हो चुकी थी, यह सबने देखा है। सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार इस कदर हावी हो चुका था कि कोर्ट को नियुक्तियों की सीबीआइ जांच कराने का आदेश देना पड़ा। यह युवाओं की प्रतिभा और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ ही नहीं, बल्कि इसके पीछे उन्हेंं कुंठित करने की कुत्सित मंशा भी थी। इसी मंशा के तहत पिछली सरकारों की शरारतो का भुक्तभोगी उत्तर प्रदेश का युवा होता था। यह वही प्रदेश है जहां बेईमानी और भ्रष्टाचार की मुहर सरकारी नौकरियों पर पहले ही लग जाती थी।

