पश्चिमी यूपी ने बढ़ाई बीजेपी की चिंता की लकीरें, जानिये क्यों भाजपा नेताओं ने डाला है यहां डेरा

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पश्चिमी यूपी ने बढ़ाई बीजेपी की चिंता की लकीरें, जानिये क्यों भाजपा नेताओं ने डाला है यहां डेरा

लखनऊ। यूपी चुनाव में पहले चरण का मतदान पश्चिमी यूपी में 10 फरवरी को होना है। 2017 के चुनाव में इस क्षेत्र से बीजेपी को झोली भरकर वोट मिले थे। पलायन और मुजफ्फरनगर के दंगों को भाजपा ने खूब भुनाया था। लेकिन, इस बार हालात उलट हैं। कृषि कानूनों के बाद किसान आंदोलन से उपजी नाराजगी ने भाजपा के लिए चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस नाराजगी को दूर करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह समेत भाजपा के दिग्गजों ने पश्चिमी यूपी के कई जिलों में डेरा डाल दिया है। पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम और दलितों की संख्या काफी अच्छी है। 2014 के पहले यहां पर बहुजन समाज पार्टी की स्थिति काफी मजबूत रही है।

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लेकिन 2014 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिमी यूपी में अपना परचम फहराया है। दंगों के बाद पलायन के दर्द से कराह रहे पश्चिमी को भारतीय जनता पार्टी के रूप में एक नया ठिकाना मिला था। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून लेकर आए और पूरा परिदृश्य बदल गया। हालांकि किसानों की नाराजगी के बाद इन कानूनों को वापस तो ले लिया गया है लेकिन एक साल तक चले आंदोलन के बीच कई किसानों ने अपनी जान गंवाई है। इतना ही नहीं आंदोलनरत किसानों के ऊपर भाजपा सरकार के मंत्रियों और नेताओं ने जिस तरीके के प्रहार किए हैं उसे पश्चिमी यूपी में बीजेपी की हालत काफी खराब मानी जा रही है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया है। भारतीय जनता पार्टी के लिए चाणक्य माने जाने वाले शाह पिछले 2 दिनों से लगातार पश्चिमी यूपी के जिलों में सक्रिय हैं और डोर टू डोर चैंपियन कर रहे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बीजेपी के कई बड़े नेता भी वहां पर डेरा डाले हुए हैं।

रालोद हुई मजबूत

2014 के लोकसभा, 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पश्चिमी यूपी में बड़ी सफलता मिली थी। खासकर जाट समुदाय ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में एकतरफा वोट डाला था। लेकिन किसान आंदोलन के बाद पश्चिमी यूपी के जिलों में राष्ट्रीय लोकदल की पकड़ काफी मजबूत हुई है। जयंत चौधरी पिछले काफी दिनों से पश्चिमी यूपी में सक्रिय भी हैं। उनकी सक्रियता और किसान आंदोलन के बाद उपजी नाराजगी ने राष्ट्रीय लोक दल को काफी मजबूती प्रदान की है। गौरतलब है कि जयंत चौधरी इस समय समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है और वहां पर राष्ट्रीय लोक दल काफी अच्छी खासी संख्या में लड़ रहा है।

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जाट समुदाय को मनाने की कोशिश

पश्चिमी यूपी में जाटों का रूख चुनावी परिणामों पर असर डालेगा। यही कारण है कि अमित शाह ने जाट समुदाय के लोगों के साथ एक मीटिंग की थी। जिसके जरिए वह वहां पर उपजी नाराजगी को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। अमित शाह ने जयंत चौधरी को भी निमंत्रण दिया था लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। इसके अलावा कई जाट समुदाय के सरपंचों ने भी अमित शाह के बैठक में आने से इंकार कर दिया था। सूत्रों का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी सर्वे एजेंसियों ने रिपोर्ट सौंपी है जिसमें भाजपा की हालत खराब बताई जा रही है। हालांकि भाजपा के चरक के माने जाने वाले अमित शाह वहां पर सक्रिय हैं और उनकी रणनीति से माहौल को बदलने की कोशिश की जा रही है।

पश्चिमी यूपी की 143 में से 108 पर फहरा था भगवा

भारतीय जनता पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में जाट समुदाय का जबरदस्त समर्थन मिला था। उसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी ने यहां की 146 में से 108 सीटों पर विजय पताका फहरा ही थी। यह सिलसिला 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जारी रहा और भारतीय जनता पार्टी को हाथों हाथ लिया गया। हालांकि इस बार बदलती परिस्थितियों के बीच पलायन और 80 बनाम 20 जैसे मुद्दों को उठाकर भारतीय जनता पार्टी ध्रुवीकरण की कोशिश तो कर रही है लेकिन किसान आंदोलन की नाराजगी अभी तक भारी पड़ती दिखाई दे रही है।

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बसपा की सक्रियता ने बढ़ाई टेंशन

पश्चिमी यूपी में बहुजन समाज पार्टी काफी मजबूत मानी जाती रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में पहले चरण की 58 सीटों में से 30 सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। जहां पर उसकी हार का अंतर बेहद कम था। हालांकि इस बार बहुजन समाज पार्टी की ज्यादा चर्चा तो नहीं हो रही थी लेकिन पिछले 15 दिनों में बसपा ने यहां पर अपनी उपस्थिति से लाइमलाइट बटोरनी शुरू कर दी है। बसपा ने जातीय समीकरणों के आधार पर टिकट वितरण और दूसरे दलों से आए नाराज नेताओं को टिकट देकर पश्चिमी यूपी में समीकरणों को त्रिकोणीय मुकाबले में लगभग तब्दील कर दिया है।

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