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वेस्ट यूपी, किसकी राह आसान और किसकी मुश्किल?

आर्टिकल/इंटरव्यूवेस्ट यूपी, किसकी राह आसान और किसकी मुश्किल?

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अमित बिश्नोई
वैसे तो कल लोकसभा चुनाव के लिए 102 सीटों पर वोट डाले जाएंगे लेकिन लोगों की निगाहें उत्तर प्रदेश की उन आठ सीटों पर हैं जिन पर कल मतदान होना है। प्रधानमंत्री मोदी ने जहाँ इस बार 400 पार का नारा दिया है वहीँ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार सभी 80 सीटें जीतने का दावा ठोंक रहे हैं. भाजपा ने पश्चिम को फतह करने के लिए इस बार रालोद को तोड़ा है, प्रधानमंत्री मोदी जी को सपा गठबंधन में फूट डालने के लिए जयंत चौधरी के दादा चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत भारत रत्न भी देना पड़ा. भाजपा को मालूम है कि यूपी में जीत का द्वार पश्चिम से ही खुलता है, अगर शुरुआत अच्छी हो गयी तो हो सकता है कि 400 पार का सपना भी पूरा हो जाय , वहीँ दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने इसबार मायावती को छोड़ कांग्रेस पार्टी से इंडिया गठबंधन के तहत हाथ मिलाया है.

कल उत्तर प्रदेश की जिन आठ सीटों पर मतदान होने वाल उसमें मुरादाबाद, नगीना, बिजनौर, सहारनपुर, कैराना, रामपुर, पीलीभीत और मुजफ्फरनगर की सीटें शामिल हैं. पिछले चुनाव में इनमें से दो सीटें सपा, तीन बसपा और तीन पर भाजपा को कामयाबी हासिल हुई थी। गौरतलब है कि पिछली बार सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन था जो पश्चिमी यूपी के लिहाज़ से काफी मज़बूत गठबंधन था, यही वजह रही कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पूरी जान लगाने के बावजूद भाजपा को पीलीभीत, मुज़फ्फरनगर और कैराना में ही कामयाबी मिल पायी थी.

लेकिन इस बार का चुनाव पहले की तुलना में बदला हुआ नज़र आ रहा है. NDA और INDIA दोनों ही गठबंधन ने बहुत सोच समझकर उम्मीदवार उतारे हैं। सबसे बड़ा बदलाव तो ये देखा जा रहा है कि भाजपा द्वारा भरपूर कोशिश के बावजूद किसी भी तरह का ध्रूवीकरण नज़र नहीं आ रहा है. अब इसका किस गठबंधन को फायदा मिलेगा ये तो 4 जून को ही पता चलेगा। अखिलेश यादव ने इसबार उम्मीदवारों के चयन में भी इस बात का ख्याल रखा है कि भाजपा को ध्रुवीकरण करने का मौका न दिया जाय, यही वजह है कि सिटींग सांसद टी हसन को प्रत्याशी घोषित करने के बाद रुचिवीरा को मुरादाबाद से उम्मीदवार घोषित किया गया।

भाजपा पिछली बार इन आठ में से पांच सीटों पर मात खा गयी थी, अब उसे अपने नए सहयोगी का कितना साथ मिलेगा ये एक बड़ा सवाल है. भाजपा ने जहाँ सात उम्मीदवार उतारे हैं तो रालोद के हिस्से में बिजनौर की सीट गयी है. फिलहाल तो जयंत चौधरी और रालोद वहीँ पर सीमित दिखाई दिए हैं ऐसे में पश्चिमी यूपी की बाकी सात सीटों पर भाजपा के लिए उसने क्या ज़ोर लगाया है ये भी एक सवाल है. पीलीभीत और नगीना की सीटें काफी चर्चित हैं। पीलीभीत जहाँ वरुण गाँधी का टिकट काटने को लेकर चर्चित रही वहीँ नगीना सीट से चंद्रशेखर आज़ाद का बहन जी के सामने ताल ठोंका एक बड़ा आकर्षण बना हुआ है. ग्राउंड रिपोर्ट की माने तो आज़ाद काफी अच्छी तरह चुनाव लड़ रहे हैं और नगीना में उन्हें जन समर्थन भी काफी मिल रहा है। जीत हासिल करेंगे इसपर यकीन से नहीं कहा जा सकता लेकिन बसपा को उन्होंने नुक्सान बहुत कर दिया है इसमें कोई दो राय नहीं है.

जहाँ तक पीलीभीत की बात है तो वरुण गाँधी का टिकट काटकर जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाने का फैसला भाजपा को भारी पड़ सकता है. पीलीभीत में वरुण गाँधी की काफी पकड़ है और लोगों का लगाव भी है. उन्हें टिकट न दिए जाने का काफी विरोध भी हुआ और यहाँ तक उनके समर्थकों ने उन्हें आज़ाद उम्मीदवार के रूप में लड़ने के लिए दबाव भी डाला, खबर यहाँ तक फैली कि वरुण ने नामांकन पत्र खरीद लिए हैं. बहरहाल वरुण गाँधी टिकट कटने के बाद शांत रहे हैं, अब देखने वाली बात ये हैं कि ये शांति किसी तूफ़ान के आने से पहले वाली शांति तो नहीं है।

इन आठ सीटों में एक हॉट सीट मुज़फ्फर नगर की भी है जिसपर केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान तीसरी बार जीत हासिल करने के लिए लगे हुए हैं, हालाँकि इसबार उनके लिए राह इतनी आसान नहीं दिख रही है. क्षेत्र में उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा और ये विरोध पार्टी लेवल पर ही हो रहा है, फिर वो संगीत सोम का मामला हो या फिर ठाकुरों की नाराज़गी का. उनके काफिले पर घातक हमला भी हुआ. 2019 में भी उन्हें सिर्फ 6 हज़ार वोटों से ही जीत मिल पायी थी, ऐसे में इतनी रुकावटों और समस्याओं के बीच उनका जीत की हैटट्रिक लगाना चमत्कार ही कहा जा सकता है. मोदी जी को अगर 400 के पार जाना है तो उसे यूपी में अपने प्रदर्शन को धमाकेदार करना होगा। कहने को तो भाजपा राम लहर पर सवार है लेकिन वो लहर लोगों को दिखाई नहीं दे रही है. पश्चिमी यूपी भाजपा के लिए हमेशा एक चैलेन्ज रहा है ऐसे में मोदी जी के सपने को पूरा करने के लिए वेस्ट यूपी से भाजपा को एक परफेक्ट शुरुआत की ज़रुरत है.

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