देहरादून। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के आए नतीजों के बाद चार राज्यों में भाजपा की सरकार अपने दम पर जीत दर्ज कर सरकार बनाने में सफल रही। अब भाजपा अपनी इन्हीं सरकारों के दम पर मिशन 2024 का खाका खीचने के लिए तैयार है। यूपी और उत्तराचंल जैसे बड़े राज्यों में भाजपा की सरकार दूसरी बार लौटी है। यानी इन राज्यों की जनता ने एक बार फिर से भाजपा पर ही भरोसा किया। जबकि अन्य दलों को नकार दिया। भाजपा की बनी नई सरकार के मंत्रिमंडल में आम चुनाव 2024 की तैयारी की झलक देखने को मिलेगी। उत्तराखंड में जहां धामी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने प्रदेश के साथ ही देश के भूतपर्व सैनिकों के वोट बैंक को कब्जा बनाए रखने का प्रयास किया वहीं महिला स्पीकर के रूप में ऋतु खंडूरी को नियुक्त कर यह जताने का कोशिश की है कि भाजपा महिलाओं के हितों का भी सम्मान रखती है।
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वहीं बात उप्र की करें तो यहां पर बड़ी सधी चाल के साथ भाजपा ने तीन उपमुख्यमंत्री पिछड़ी और अन्य जातियों के बनाकर जातियों के वोट बैंक को कब्जाने की कोशिश की है। भाजपा ने उत्तराखंड में शपथ ग्रहण को भव्य बना 2024 के एजेंडा को सेट करने का काम किया। भाजपा ने यह भी जता दिया है कि 2024 में भी उसका एजेंडा हिंदुत्व कार्ड ही होगा। इस हिंदुत्व कार्ड की शुरूआत भाजपा ने इसी देवभूमि से की। जानकारों की माने तो राम मंदिर निर्माण शुरू होते ही भाजपा का हिदुत्व का एजेंडा हल्का हो गया था। लेकिन चुनाव के परिणाम से लगता है कि भाजपा का हिंदुत्व कार्ड अब भी पूरी तेजी से भाग रहा है। उत्तराखंड हो या फिर यूपी दोनों के विधानसभा चुनाव (Assembly elections) और उसके परिणाम में यह देखने को मिल गया। कांग्रेस भी अब हिंदुत्व के चिंतन पर मंथन कर रही है। इन चुनावों में सबसे अधिक नुकसान धार्मिक ध्रुवीकरण राजनीति के कारण हुआ। जिसका असर उप्र में सपा,बसपा और कांग्रेस पर पड़ा। वहीं उत्तराखंड में तो कांग्रेस इस धार्मिक ध्रुवीकरण की आंधी में उड़ ही गई।

