क्या राजस्थान मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट खेमे को मिलेगा उचित सम्मान?

उत्तर प्रदेशक्या राजस्थान मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट खेमे को मिलेगा उचित सम्मान?

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क्या राजस्थान मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट खेमे को मिलेगा उचित सम्मान?

लखनऊ: कांग्रेस क्या राजस्थान में पिछले दो वर्षों से चली आ रही पार्टी की अंतर्कलह को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार से खत्म करने में सफल होगी ? जयपुर से लेकर दिल्ली तक, कांग्रेसी इसी उत्तर की तलाश कर रहे है। हालांकि, सचिन पायलट का खेमा इस विस्तार को लेकर खासा उत्साहित दिख रहा है, लेकिन जो लोग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके राजन इक्टिक कौसहल को जानते है उन्हे पता है कि वो आखरी समय तक अपना पलड़ा कमजोर नहीं होने देंगे। इससे पहले इस विस्तार के सिलसिले में दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर बुधवार को एक बैठक हुई जिसमें राहुल गांधी को छोड़कर गहलोत, अजय माकन, प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल भी मौजूद थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में राजस्थान में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम मुहर लग गई है।

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गौरतलब है की  गहलोत के दिल्ली दौरे से प्रदेश कांग्रेस में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सुगबुगाहट बढ़ गई है। वहीं इसी दौरे के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट के भी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलने की चर्चा तेज हो गई है। बतादे कि राजस्थान में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में मौजूदा 21 मंत्रियों के बाद नौ मंत्री पद रिक्त हैं। घटनाक्रम से परिचित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथियों को कम से कम चार और अशोक गहलोत के करीबियों को करीब पाँच मंत्री पद मिलने के आसार है। सूबे की 200 सदस्यों की संख्या वाली विधानसभा में कुल 15 फीसदी को सदस्यों को ही मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है यानि केवल 30 मंत्री ही बनाए जा सकते है।

बतादे कि वर्तमान में राज्य कांग्रेस की गहलोत सरकार के पास उपचुनाव के बाद कुल 108 विधायक है। वहीं छह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से कांग्रेस में शामिल हुए और अन्य 13 में से 10 निर्दलीय, दो बीटीपी और सीपीआई और एक बलवान पूनिया स्वयं है जिन्होंने पायलट-गहलोत विवाद से उत्पन्न संकट के समय गहलोत का साथ दिया था। ज्ञात हो कि विधानसभा उपचुनाव और पंचायती राज चुनाव के बाद काँग्रेस दो धड़ों में बंट गई थी और जिसने भी गहलोत सरकार को संकट से उबारने में उनका साथ दिया था उन सभी को राजनीतिक एडजस्टमेंट का इंतेजार है।  

हालांकि पार्टी के भीतर और बाहर इस विस्तार को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई है। घटना के जानकार एक नेता के अनुसार नौ रिक्त मंत्रिपदों के अलावा भी तीन और मंत्री अपना पद छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री गहलोत गुरुवार को दिल्ली से लौटने पर राज्यपाल कलराज मिश्रा से मिलकर मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख के बारे में चर्चा कर सकते है।

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वहीं सचिन पायलट ने भी एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि “हमारी हाई कमान से बात हुई है और वो हमारी मांगों से सहमत है। प्रदेश में सरकार को शपथ लिए अब तीन वर्ष से अधिक हो गए है और पार्टी को सत्ता में पहुंचाने वाले कार्यकर्ताओं को उनका उचित राजनीतिक हक मिलना ही चाहिए। “

हालांकि प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पंजाब में हुई राजनीतिक दुर्घटना से सबक लेते हुए कांग्रेस राजस्थान में फूँक-फूँक कर कदम रख रही है, लेकिन जल्द ही यह पता चल जाएगा कि सूबे में पायलट और गहलोत में से किसका पलड़ा भारी है?

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