लखनऊ। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति – पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे को अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन बनाने की तैयारी की जा रही है। यूपी में करीब आठ लाख आरक्षित वर्ग के कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों की तैयारी है कि इसको पूरे देश के कर्मचारी मिलकर अब एक बड़ा आंदोलन के रूप में खड़ा करें। यूपी समेत पांच राज्यों के चुनावों के बाद इसकी रूपरेखा को तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसको अमलीजामा पहना दिया जाएगा। आरक्षण समर्थकों का तर्क है कि किसानों के आंदोलन से सीख लेने की जरूरत है। अब हमें अपने संवैधानिक हकों के लिए सड़क से लेकर सदन तक की लड़ाई को लड़ना होगा। यूपी समेत कई राज्यों के आरक्षण समर्थक नेताओं से संपर्क कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाने लगी है।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि यूपी के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड सहित दिल्ली के आरक्षण समर्थक नेताओं से आंदोलन की भूमिका को लेकर बात हो गई है। चुनाव बाद इसको अमलीजामा पहनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का लंबित 117वां बिल सरकार पास नहीं कर रही है। 10 सालों से इसको अटकाकर रखा गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से इसको पारित करने को लेकर कई बार गुहार लगाई जा चुकी है। लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। उन्होंने कहा कि मोदी खुद को लगातार वंचित वर्ग का व्यक्ति बताते हैं, लेकिन जब वंचितों के हक की बात आती है तो चुप्पी साध जाते हैं। यह बहुत ही दुखद है। जिस तरह से सरकारें आरक्षण समर्थक कार्मिकों के साथ रवैया अख्तियार कर रहीं है, वो बहुत ही दुखद है। लेकिन, अब जवाब देने की बारी आ गई है। घरों से निकलने की बारी आ गई है। क्योंकि हम जब तक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर नहीं उतरेंगे, ये सरकारें हमारे मुद्दों को ऐसे ही लटकाती रहेंगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। बहुत ही जल्द इस आंदोलन को जमीन पर उतारा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह ऐतिहासिक आंदोलन होगा और इससे आरक्षण समर्थक कार्मिक न सिर्फ अपना भविष्य तय करेंगे बल्कि सरकारों का भी भविष्य उनके हाथ में होगा।
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दलितों के साथ पिछड़ों को भी शामिल करें
यूपी में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार के दौरान प्रमोशन में आरक्षण को लागू किया गया था। बाद में यह मामला कोर्ट में चला गया। उसके बाद सपा की अखिलेश सरकार ने अपने वादे के अनुसार इसका विरोध किया और यूपी में करीब दो लाख दलित कार्मिकों को रिवर्ट कर दिया गया। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश के दो लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक अपमान का घूंट पीकर रह गए थे। हालांकि इसका बदला भी उन्होंने सरकार को हराकर लिया। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि प्रमोशन में आरक्षण के फॉर्मूले में दलितों के साथ पिछड़ों को भी शामिल किया जाए। ताकि संवैधानिक अधिकार उन्हें भी मिल सके।
कई जगहों पर नहीं है प्रतिनिधित्व
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सरकार भी कहती है कि प्रमोशन में आरक्षण नहीं होने से आरक्षित वर्ग के कार्मिकों का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी समेत कई जगहों पर आरक्षितों के बड़े पद खाली हैं। इसका डाटा भी वो जारी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि पदोन्नति में आरक्षण का बिल लागू कर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों-अधिकारियों के साथ न्याय किया जाए।
सुरक्षित सीटों पर माननीयों की बढ़ेंगी मुश्किलें
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि प्रमोशन में आरक्षण को लागू किया जाए। यह न सिर्फ मांग है बल्कि इसके लिए हमने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांगों की अनदेखी करने वालों को सत्ता में नहीं आने देंगे। इसके लिए हम यूपी की सुरक्षित सीटों पर पांच-पांच आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की एक कमेटी बनाये हैं जो प्रत्याशियों का आंकलन कर रहीं हैं। जो हमारे मानकों पर खतरा उतरेगा, हम उसके साथ जाएंगे। उन्होंने यूपी हो या देश, आरक्षित वर्ग की सीटों पर जो सबसे ज्यादा जीतता है वही सरकार बनाता है। ऐसे में हम इस बार आरक्षण समर्थक सरकार ही बनाएंगे।

